पटियाला, 23 दिसंबर- सांस्कृतिक दृष्टि से पंजाब के लोक व्यवसायों में हो रहे बदलाव के विभिन्न पहलुओं और कारणों को जानने के लिए पंजाबी विश्वविद्यालय में किए गए एक हालिया अध्ययन में महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं। प्रोफेसर जगतार सिंह जोगा की देखरेख में विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग के एक शोधकर्ता गुरजंत सिंह द्वारा किए गए इस अध्ययन के माध्यम से, पंजाब के पारंपरिक लोक व्यवसायों के परिवर्तन के संबंध में विभिन्न अंशों को पढ़ा और खोजा गया है।
शोधकर्ता गुरजंत सिंह ने बताया है कि इस शोध कार्य के अंतर्गत पंजाब के लोगों के व्यवसायों में कृषि, बढ़ईगीरी, लोहार, सुनार, सुनार, मोची, ठठियारा और जुलाहा व्यवसायों को शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि पंजाबी लोक साहित्य में इन लोक व्यवसायों को विभिन्न रूपों में प्रस्तुत किया गया है, जिसके आधार पर सांस्कृतिक परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं की पहचान की गई है।
उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी में बदलाव के कारण विभिन्न व्यवसायों की एक-दूसरे पर निर्भरता कम हुई है, सांस्कृतिक जुड़ाव भी खत्म हुआ है। उन्होंने कहा कि एक और महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि पंजाब के सार्वजनिक व्यवसायों ने उन तकनीकी युक्तियों को अपनाया जिनका पर्यावरण और सतत विकास के प्रति सकारात्मक और सकारात्मक दृष्टिकोण था। डॉ. जगतार सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकी के विकास का मूल उद्देश्य ऐसी तकनीकों की खोज करना है जो मानव ऊर्जा के कम से कम उपयोग के साथ अधिक आरामदायक सुविधाएं प्रदान करें।
इस उद्धरण के साथ, लगातार बदलती परिस्थितियों के संदर्भ में पंजाब के लोक व्यवसायों में सांस्कृतिक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोक व्यवसायों के परिवर्तन ने संस्कृति के सार और कार्य पद्धति को बदल दिया है। पंजाब के लोक व्यवसायों में परिवर्तन के माध्यम से लोगों के रहन-सहन, पहनावे, खान-पान, रहन-सहन, उपयोग व्यवहार, मनोरंजन और लोकगीत सामग्री में परिवर्तनशीलता सामने आई है।
उन्होंने कहा कि अध्ययन से यह भी सामने आया कि प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ मानव सौंदर्य का भी विकास हुआ. जिससे साधारण व्यवसाय धीरे-धीरे कलात्मक व्यवसायों में बदल गये। डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रोफेसर नरिंदर कौर मुल्तानी ने इस शोध कार्य की सराहना की और बधाई दी।
सार्वजनिक व्यवसायों में बदलाव को लेकर पंजाबी यूनिवर्सिटी के शोध में सामने आए अहम तथ्य
