पटियाला, 17 अगस्त:- आज यहां प्रेस के नाम बयान जारी करते हुए पीआरटीसी वर्कर्स एक्शन कमेटी के कनवीनर निर्मल सिंह धालीवाल और मेंबरान सर्व श्री बलदेव राज बत्ता, हरप्रीत सिंह खटड़ा, नसीब चंद, तरसेम सिंह और मोहम्मद खलील ने कहा कि पीआरटीसी की मैनेजमेंट जहां वर्करों के कानूनी तौर पर मंजूर कई तरह के वित्तीय लाभ लागू करने से आपराधिक तरीके से कोताही करके कानून की धज्जियां उड़ा रही है, वहीं अब मैनेजमेंट संस्था की बेहतरी और संचालन करने में बुरी तरह फेल हो चुकी है। स्पष्ट तौर पर संस्था के हर पक्ष की कुप्रबंधन के कारण घोर अनदेखी की जा रही है, जिससे साफ नजर आ रहा है कि संस्था का भविष्य बहुत धुंधला हो जाना है और वित्तीय संकट खड़ा हो जाएगा, जिसका खामियाजा पीआरटीसी के मौजूदा कर्मचारी और पेंशनर भुगतेंगे। पर इस कुप्रबंधन के लिए संस्था के किसी अधिकारी को इस भ्रष्ट निजाम में कुछ नहीं कहा जाएगा।
एक्शन कमेटी के नेताओं ने सख्त रोष प्रकट करते हुए कहा कि पीआरटीसी की मैनेजमेंट ने सरकार द्वारा एनपीएस संबंधी किए हुए हुक्मों का उल्लंघन करके हकदार वर्करों को एनपीएस का अब तक हकदार नहीं बनाया, जिससे वर्करों का भविष्य का अनपेक्षित नुकसान हो रहा है। इसी तरह 50 के करीब कर्मचारी, जिन्होंने जनवरी 2004 से पहले नौकरी के लिए अप्लाई किया था पर नौकरी जनवरी 2004 के बाद मिली थी, वे सरकार के हुक्मों मुताबिक पुरानी पेंशन के हकदार हैं, पर प्रबंधकों ने अब तक भी उन्हें पेंशन का लाभ नहीं दिया। पंजाब सरकार द्वारा एक साल पहले टीए-डीए के रेट रिवाइज किए थे, यह भी हमारे प्रबंधकों ने लागू करने को तुच्छ समझा हुआ है। सेवा-मुक्त कर्मचारियों को दो साल बाद एक बेसिक पे के तौर पर मिलने वाला यात्रा भत्ता भी नहीं दिया जा रहा। यह सलूक कर रही है हमारी मैनेजमेंट सीनियर सिटीजन के साथ।
वर्करों के 70 करोड़ रुपये से अधिक के बनते विभिन्न किस्म के वित्तीय बकाए कई-कई सालों से नहीं दिए जा रहे। पंजाब सरकार मुफ्त सफर सुविधाओं के 600 करोड़ रुपये से अधिक की रकम पीआरटीसी को नहीं दे रही, जिसके कारण तनख्वाह, पेंशन और अनेक किस्म के अन्य वित्तीय बकाए कभी भी समय पर नहीं मिल रहे। वर्करों की तरक्कियों की फाइलें नहीं निकाली जातीं। फिजूल खर्चियों से जरा भी गुरेज नहीं किया जा रहा। किलोमीटर स्कीम अधीन 250 नई बसें डाले जाने के बावजूद कुप्रबंधन के कारण आमदन में बिल्कुल भी कोई वृद्धि नहीं हुई, जबकि लगभग रोजाना का 40 लाख रुपया खर्चा बढ़ गया है।
संस्था के बेहतर संचालन के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। पटियाले में बने नए बस स्टैंड की बनी बिल्डिंग का किसी तकनीकी उच्च संस्था से लगे हुए मटेरियल की पड़ताल करवाई जाए, ताकि बिल्डिंग में आई दरारें, लीकेज, सीमेंट और अन्य फिटिंग्स की गुणवत्ता आदि का पता लग सके। बस स्टैंड पर पेशाब घर और पखाने जरूरत से आधे भी नहीं हैं। बस अड्डे और वर्कशॉप में प्लानिंग की कमी के कारण बसें खड़ी करने और रिपेयर करने का प्रबंध किसी तरह भी उचित नहीं है। कर्मचारियों के व्हीकल खड़े करने के लिए कोई उचित जगह का प्रबंध नहीं है।
एक्शन कमेटी के नेताओं ने ऐलान किया कि अगर बिना किसी टाल-मटोल के वर्णित मांगें 15 दिनों के अंदर-अंदर पूर्ण रूप में मान कर लागू न की गईं तो 8 सितंबर 2026 को पीआरटीसी पटियाला के मुख्य दफ्तर के सामने विशाल धरना दिया जाएगा और इससे पहले रैलियों, प्रेस नोट, मीटिंगों आदि का सिलसिला लगातार जारी रखा जाएगा।