चंडीगढ़, 10 फरवरी, 2026:- पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के प्रायोगिक चिकित्सा एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 10 फरवरी, 2026 को नेहरू अस्पताल, पीजीआईएमईआर के लेक्चर थियेटर-1 में 14वीं प्रो. आर. एन. चक्रवर्ती स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस प्रतिष्ठित व्याख्यान को भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के जैव रसायन विभाग एवं केंद्रीय पशु सुविधा के अध्यक्ष प्रो. सतीश सी. राघवन द्वारा “डीएनए डबल-स्ट्रैंड ब्रेक रिपेयर: यांत्रिक समझ से कैंसर उपचार तक” विषय पर प्रस्तुत किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए पीजीआईएमईआर के डीन (अनुसंधान) प्रो. संजय जैन ने दिवंगत प्रो. आर. एन. चक्रवर्ती के प्रायोगिक चिकित्सा क्षेत्र में अग्रणी एवं परिवर्तनकारी योगदानों को रेखांकित किया और कहा कि उनकी विरासत देश में चिकित्सा शोधकर्ताओं की पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।
व्याख्याता का परिचय प्रायोगिक चिकित्सा एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख प्रो. दिव्यज्योति बनर्जी ने कराया। उन्होंने डीएनए मरम्मत के क्षेत्र में प्रो. राघवन के महत्वपूर्ण योगदानों को रेखांकित किया, विशेष रूप से डीएनए मरम्मत मार्गों के छोटे-अणु अवरोधकों के विकास में, जिनमें उनके समूह द्वारा भारत में खोजे गए अवरोधक भी शामिल हैं।
अपने व्याख्यान में प्रो. राघवन ने बताया कि कोशिकाएँ हानिकारक डीएनए डबल-स्ट्रैंड ब्रेक्स के प्रति किस प्रकार प्रतिक्रिया देती हैं तथा अपनी प्रयोगशाला से उभर रही अनुवादात्मक प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने SCR7 को एक संभावित कैंसर-रोधी अणु के रूप में रेखांकित किया, जो नॉन-होमोलॉगस एंड जॉइनिंग (NHEJ) नामक एक प्रमुख डीएनए मरम्मत मार्ग को अवरुद्ध करता है और जिसने इन विट्रो तथा एक्स विवो मॉडलों में प्रभावशीलता प्रदर्शित की है। उन्होंने गुणसूत्रीय अस्थिरता, डीएनए मरम्मत तंत्र और कैंसर उपचार में प्रतिरक्षा प्रणाली की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का समापन प्रायोगिक चिकित्सा एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग की प्रो. अलका भाटिया द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
इस कार्यक्रम में प्रो. संजीव हांडा, सब-डीन (शैक्षणिक), एमेरिटस प्रोफेसरगण, संकाय सदस्य, शोधकर्ता, विद्यार्थी तथा संस्थान के अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।