चंडीगढ़ : 23 सितंबर, 2025: पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग ने आज 8वीं प्रो. जे.के. अरोड़ा स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन किया। यह कार्यक्रम प्रो. (डॉ.) जे.के. अरोड़ा की स्मृति को समर्पित था, जो पीईसी के पूर्व छात्र, प्रतिष्ठित शिक्षक और शोधकर्ता रहे हैं।
इस अवसर पर प्रो. अरोड़ा के परिवार के सदस्य श्रीमती आशा अरोड़ा (पत्नी), डॉ. अल्पना अरोड़ा (बड़ी बेटी), सुश्री श्रुति अरोड़ा (छोटी बेटी), और डॉ. मन्या (पोती) उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. रिंतु खन्ना द्वारा प्रो. अरोड़ा के जीवन और योगदान को याद करते हुए हुई। प्रो. अरोड़ा ने 1960 में पीईसी से स्वर्ण और रजत पदक के साथ स्नातक किया, 1967 में परास्नातक की डिग्री पूरी की और 1971 में मोंटाना स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका से पीएच.डी. प्राप्त की। 1996 में सेवानिवृत्ति तक उन्होंने पीईसी में उत्कृष्ट सेवाएँ दीं। विद्युत पावर सिस्टम और अर्थिंग डिज़ाइन सिस्टम में विशेषज्ञता के साथ उन्होंने अपने 49 वर्षीय करियर में 40 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए और सीबीआईपी जैसी संस्थाओं से जुड़े रहे।
पेक के निदेशक प्रो. राजेश कुमार भाटिया ने प्रो. अरोड़ा की विरासत को स्मरण किया और उनके परिवार का कॉलेज में स्वागत किया। उन्होंने अतिथि वक्ता प्रो. श्रीनिवास राघवन का भी स्वागत किया।
“हाउ कृस्टल्स ग्रोथ एनेबल्स योर इलेक्ट्रॉनिक्स वर्ल्ड" विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रो. राघवन ने बताया कि कैसे गैलियम नाइट्राइड (GaN), सिलिकॉन के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की दिशा बदल रहा है। उन्होंने समझाया कि परमाणु स्तर पर क्रिस्टल ग्रोथ और दोषों के नियंत्रण से न केवल मोबाइल और एलईडी बल्ब जैसी तकनीकें संभव हुई हैं, बल्कि आने वाले समय में वायरलेस संचार, ऊर्जा उपभोग और 2-डी मैटेरियल्स जैसे नए आयाम भी खुलेंगे।
व्याख्यान ने श्रोताओं को गहराई से प्रेरित किया और यह अवसर प्रो. अरोड़ा की स्मृति तथा आधुनिक शोध के संगम का प्रतीक बना।