चंडीगढ़, 25 सितंबर, 2026: पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ ने संस्थान के सबसे प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों में से एक तथा भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अग्रणी व्यक्तित्व प्रो. सतीश धवन के जीवन, योगदान और उनकी अमिट विरासत को स्मरण करते हुए उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का आयोजन प्रो. राजेश भाटिया के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें संकाय सदस्यों, अतिथियों, विद्यार्थियों और पीईसी समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन के साथ हुई, जिसके बाद प्रो. सतीश धवन की उल्लेखनीय उपलब्धियों और विरासत पर संक्षिप्त प्रकाश डाला गया। वर्ष 1945 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद प्रो. धवन आधुनिक भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल हुए। उन्हें व्यापक रूप से “भारत में प्रायोगिक द्रव गतिकी के जनक” के रूप में जाना जाता है। उन्होंने वर्ष 1972 से 1984 तक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी दौर में दूरदर्शी नेतृत्व प्रदान किया।

कार्यक्रम में उनके नेतृत्व में किए गए कई महत्वपूर्ण योगदानों को रेखांकित किया गया, जिनमें वर्ष 1975 में भारत के प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट का प्रक्षेपण तथा SLV-3 रॉकेट का विकास प्रमुख हैं। इन उपलब्धियों ने आगे चलकर INSAT और PSLV जैसे अंतरिक्ष कार्यक्रमों की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीमा-परत (Boundary Layer) अनुसंधान के क्षेत्र में उनका अग्रणी कार्य तथा प्रायोगिक द्रव गतिकी में उनके योगदान ने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उनकी विशिष्ट विरासत को और मजबूत किया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उनके योगदान के प्रति एक स्थायी श्रद्धांजलि के रूप में स्थापित है।

दर्शकों के लिए प्रो. सतीश धवन के जीवन, उपलब्धियों और उनकी यात्रा पर आधारित एक वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया। इस वृत्तचित्र के माध्यम से प्रतिभागियों को उनके उल्लेखनीय करियर, वैज्ञानिक योगदान, नेतृत्व क्षमता तथा पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ उनके संबंधों को और गहराई से समझने का अवसर मिला।

वृत्तचित्र प्रदर्शन के बाद एक खुला संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों, अतिथियों और उपस्थित लोगों को प्रो. सतीश धवन के व्यक्तित्व तथा भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में उनके स्थायी योगदान से जुड़ी अपनी विचारधाराएँ, स्मृतियाँ और अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया। इस संवादात्मक सत्र ने पीईसी समुदाय को उनकी वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नेतृत्व, विनम्रता और स्थायी विरासत पर चिंतन करने का अवसर प्रदान किया।

कार्यक्रम का समापन गणमान्य अतिथियों, संकाय सदस्यों, अतिथियों, विद्यार्थियों, आयोजकों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों से महान वैज्ञानिक के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का भी आह्वान किया गया, जिनके उल्लेखनीय योगदान और अमिट विरासत ने देश को समृद्ध किया।

यह कार्यक्रम प्रो. सतीश धवन को एक सार्थक श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया गया और पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के अपने इस प्रतिष्ठित पूर्व छात्र के साथ स्थायी संबंध को पुनः रेखांकित किया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान आज भी वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और विद्यार्थियों की पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।