चंडीगढ़, 06 नवम्बर, 2025: मेटल वेस्ट रीसाइक्लिंग में सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने में अपने उत्कृष्ट प्रयासों और अनुसंधान योगदान के लिए, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ के प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर, डॉ. जिमी करलूपिया को भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा 45 वर्ष से कम आयु के ‘यंग एस एंड टी लीडर’ के रूप में चयनित किया गया है। यह सम्मान एमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC 2025) में प्रदान किया गया, जो 3 से 5 नवम्बर 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
इस कॉन्क्लेव का उद्घाटन भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया। इसमें अकादमिक, उद्योग और सरकारी क्षेत्रों से 3,000 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। यह आयोजन 11 थीम आधारित क्षेत्रों में भारत के नवाचार और अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की प्रगति को दर्शाता है और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन की दिशा में देश के परिवर्तन को सशक्त बनाने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में कार्य कर रहा है।
डॉ. करलूपिया का अनुसंधान कार्य ऑटोमोटिव घटकों और औद्योगिक अपशिष्ट से धातुओं और मिश्र धातुओं के पुनर्चक्रण पर केंद्रित है। वे स्क्रैप धातुओं को उच्च प्रदर्शन वाली कंपोजिट सामग्रियों में परिवर्तित करते हैं, जिनमें अधिक यांत्रिक मजबूती और टिकाऊपन होती है। उनका यह कार्य देश की कच्चे माल के आयात पर निर्भरता को कम करते हुए उन्नत सामग्रियों और विनिर्माण के क्षेत्र में सतत और आत्मनिर्भर निर्माण को बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम के दौरान, माननीय केंद्रीय मंत्री (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने राष्ट्रीय महत्व और परिवर्तनकारी क्षेत्रों में कार्य कर रहे युवा शोधकर्ताओं के योगदान की सराहना की। उन्होंने उन्हें ‘विकसित भारत 2047’ मिशन के अनुरूप रणनीतिक प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने और विज्ञान एवं नवाचार में भारत की वैश्विक नेतृत्व स्थिति को सशक्त करने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर प्रो. अजय कुमार सूद (प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार), प्रो. अभय करंदीकर (सचिव, डीएसटी), तथा डॉ. शिवकुमार कल्याणारमन (मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन) सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने अकादमिक, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग से नवाचार और ज्ञान-आधारित विकास को सुदृढ़ करने पर बल दिया।
ESTIC 2025 के प्रमुख वक्ताओं में प्रो. आंद्रे गीम (नोबेल पुरस्कार विजेता, यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर), प्रो. मसारू टोमिता (केयो यूनिवर्सिटी, जापान), ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (भारतीय वायुसेना एवं इसरो), प्रो. गोविंदन रंगराजन (निदेशक, आईआईएससी बेंगलुरु), और प्रो. बी. एस. मूर्ति (निदेशक, आईआईटी हैदराबाद) शामिल रहे, जिन्होंने विज्ञान, नवाचार और राष्ट्रीय विकास पर अपने प्रेरक विचार साझा किए।