लेहरागागा, 16 जून: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) के कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर द्वारा नाबार्ड के सक्रिय सहयोग से चलाए जा रहे “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत ब्लॉक लेहरागागा के गांव घोरेनाब में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के लिए एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में पीएयू-केवीके संगरूर के प्रभारी डॉ. मनदीप सिंह ने राष्ट्रीय स्तर के अभियान “खेत बचाओ अभियान” के उद्देश्यों तथा इसके अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने एफपीओ प्रतिनिधियों से अपील की कि वे किसानों तक खरीफ फसलों के लिए अनुशंसित कृषि तकनीकों तथा संतुलित उर्वरक उपयोग का संदेश पहुंचाएं। उन्होंने किसानों के कल्याण हेतु पीएयू-केवीके संगरूर द्वारा प्रदान की जा रही विभिन्न सुविधाओं एवं सेवाओं की जानकारी भी साझा की। डॉ. सिंह ने किसानों को धान एवं बासमती फसलों में फास्फोरस उर्वरकों का प्रयोग न करने की सलाह दी तथा हरी खाद वाली फसलों के माध्यम से यूरिया की बचत संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।
सहायक प्रोफेसर (कृषि विज्ञान) डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह ने कहा कि केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय गोबर की खाद, हरी खाद, जैव उर्वरकों तथा फसल अवशेषों को खेत में मिलाकर मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने धान और बासमती में वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन, खेत से मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक विधि, धान में बौनेपन (ड्वार्फिंग) वायरस रोग की रोकथाम तथा धान एवं बासमती में खरपतवार प्रबंधन संबंधी विस्तृत जानकारी दी।
नाबार्ड, संगरूर के जिला विकास प्रबंधक मुनीश गुप्ता ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बैंक खातों और एटीएम कार्डों से संबंधित धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत बैंक अधिकारियों को सूचित करने तथा ग्राहक सेवा हेल्पलाइन नंबर के उपयोग संबंधी जानकारी भी प्रदान की।
भारतीय स्टेट बैंक, संगरूर के जिला प्रबंधक एवं लीड बैंक अधिकारी सुरमुख सिंह ने किसानों को एफपीओ गठित करने के लिए प्रेरित किया ताकि वे बेहतर कृषि सेवाओं का लाभ उठा सकें और खेती की लागत कम कर सकें। उन्होंने किसान उत्पादक संगठन के गठन की प्रक्रिया और इसके लाभों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
कृषि विकास अधिकारी, लेहरागागा डॉ. कुलवंत सिंह ने धान की सीधी बिजाई, खरीफ मक्का, बीटी कपास तथा जिप्सम के उपयोग संबंधी जानकारी दी। साथ ही उन्होंने इन फसलों एवं तकनीकों पर उपलब्ध सरकारी सब्सिडी योजनाओं के बारे में भी किसानों को अवगत कराया।
शिविर के अंत में जीनियस किसान उत्पादक संगठन, लेहरागागा के निदेशक हुशियार सिंह ने कृषि विशेषज्ञों और नाबार्ड अधिकारियों का धन्यवाद किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिविर में प्राप्त जानकारी को संगठन के माध्यम से अन्य किसानों तक पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ पहुंचाया जाएगा।
इस अवसर पर जीनियस कृषि सेवा केंद्र के निदेशक करमजीत सिंह, जगतार सिंह, सरदूल सिंह और नजर सिंह भी उपस्थित रहे। सरपंच लखबीर सिंह तथा परमजीत सिंह ने भी विशेष रूप से कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम के समापन पर पीएयू-कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर के विशेषज्ञों ने धान की नर्सरी, साइलेज मक्का तथा ग्रीष्मकालीन मूंग की फसलों का निरीक्षण किया और किसानों को वैज्ञानिक प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए।