करनाल, 2 मार्च:- भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने हरियाणा सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को किसान और ग्रामीण विरोधी करार देते हुए कहा कि यह बजट जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बड़े-बड़े दावे तो किए हैं, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने, फसलों के लाभकारी मूल्य, कर्ज माफी और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए कोई ठोस और स्पष्ट प्रावधान नहीं किए गए।
रतनमान ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ किसान है, लेकिन बजट में कृषि क्षेत्र के लिए अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं दिखती। उन्होंने मांग की कि गेहूं, धान सहित सभी फसलों पर कानूनी गारंटी के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू किया जाए। साथ ही डीजल, खाद, बीज और कीटनाशकों पर बढ़ती लागत को कम करने के लिए विशेष सब्सिडी पैकेज दिया जाए।
भाकियू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के मुआवजे की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होनी चाहिए। फसल बीमा योजना में आ रही खामियों को दूर कर क्लेम का भुगतान तय समय सीमा में किया जाए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में टूटी सड़कों, नहरों की सफाई और बिजली आपूर्ति की अनियमितता पर भी सरकार को घेरा।
रतनमान ने आरोप लगाया कि सरकार उद्योग और शहरी विकास पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जबकि गांवों की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बजट में किसानों की मांगों पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो प्रदेशभर में पंचायतें आयोजित कर आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन जल्द ही जिला स्तर पर बैठकों का आयोजन कर आगामी रणनीति तय करेगी और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा। किसानों के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई हर हाल में जारी रहेगी।