खन्ना:- गंभीर सेप्सिस, मेनिन्जाइटिस और एक्यूट रीनल फेल्योर से पीड़ित व समय से पहले जन्मी नवजात बच्ची को  लिवासा अस्पताल, खन्ना में सफल उपचार के बाद नई जिंदगी मिली।
1.97 किलोग्राम के कम वजन व 35 सप्ताह के गर्भकाल में जन्मी नवजात बच्ची को जन्म के चौथे दिन सांस लेने में तकलीफ के साथ  लिवासा  अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले बच्ची को एक बाहरी अस्पताल में इंट्यूबेट किया गया था। 
भर्ती होने पर विस्तृत जांच में गंभीर नवजात सेप्सिस और एक्यूट रीनल फेल्योर का पता चला। रक्त परीक्षण में एस्चेरिचिया कोलाई (ई. कोलाई) संक्रमण की पुष्टि हुई, जो ग्राम-नेगेटिव सेप्टीसीमिया का संकेत था, जबकि मस्तिष्क-रीढ़ की हड्डी के द्रव की जांच में मेनिन्जाइटिस पाया गया, जो सेंट्रल नर्वस सिस्टम इंवॉल्वमेंट को दर्शा  रहा था।
कंसल्टेंट-  लिवासा अस्पताल डॉ. शेखर सिंगला ने बताया कि शिशु की हालत गंभीर थी और उसे पेशाब नहीं आ रहा था, जो गुर्दे की गंभीर खराबी का संकेत था।
आईवीआईजी थेरेपी के बाद, नवजात शिशु के नैदानिक स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ, धीरे-धीरे स्थिति स्थिर हुई, गुर्दे की कार्यक्षमता में सुधार हुआ और संक्रमण ठीक हो गया। शिशु को रक्त संचार की दृष्टि से स्थिर स्थिति में और सामान्य न्यूरोलॉजिकल संबंधी जांच के साथ अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।