चंडीगढ़, 8 सितंबर:- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने के दो घंटे से भी कम समय बाद, जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को महत्वपूर्ण महंगाई भत्ते (डी.ए.) के मामले की सुनवाई करते हुए अपने कार्यकाल का सख्त रुख स्पष्ट कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी आलोचना या दबाव के आगे नहीं झुकेगी और कानून के शासन तथा संविधान के प्रति अपनी शपथ के दायरे में काम करेगी।
यह बयान उस समय सामने आया जब मुख्य न्यायाधीश मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों को बकाया डी.ए./डी.आर. की अदायगी संबंधी अदालत के आदेशों के अनुपालन से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान राज्य के वकील द्वारा ऊंची आवाज में बोलने पर कड़ी आपत्ति जताई।
मुख्य न्यायाधीश मिश्रा ने कहा, “यह अदालत कानून के शासन के तहत चलेगी और यह संस्था किसी भी प्रकार के हथकंडों के आगे नहीं झुकेगी। इसलिए, हम पूरी तरह कानून के मुताबिक चलेंगे। हमने संविधान की शपथ ली है और हम जानते हैं कि अपनी शपथ को कैसे निभाना है और इसकी रक्षा कैसे करनी है।”
बेंच ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी पक्ष की दलीलों से प्रभावित नहीं होगी। जस्टिस मिश्रा ने कहा, “किसी भी पक्ष की ओर से टिप्पणी न की जाए! आपके पास कहने या करने के लिए बहुत कुछ हो सकता है, लेकिन हम कानून के मुताबिक चलेंगे। हमने संविधान की शपथ ली है।”
ये टिप्पणियां बेंच के उस अगस्त महीने के आदेश से पैदा हुई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आईं, जिसमें पंजाब को अपने कर्मचारियों और पेंशनरों को डी.ए./डी.आर. की सभी बकाया किस्तें 31 अगस्त तक जारी करने और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता, राज्य सरकार प्रिंट या सोशल मीडिया पर विज्ञापन अभियानों जैसे गैर-उत्पादक खर्चे न करे।
इस आदेश को बाद में राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील संजय कौशल ने बताया कि पंजाब ने 31 अगस्त के बाद अपनी चुनौती दाखिल की है और सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा निकाली गई खामियों को अभी दूर किया जाना बाकी है।
कौशल ने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा अखबारों में अभी भी विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं और रक्षाबंधन के मौके पर महिलाओं के लिए करोड़ों रुपये जारी करने का हवाला भी दिया।
एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील चेतन मित्तल ने बताया कि राज्य सरकार ने हाई कोर्ट द्वारा निर्देशित अनुपालन हलफनामा अभी तक दाखिल नहीं किया है। हालांकि, बेंच ने कहा कि वह केस की फाइल देखने के बाद ही याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। यह मामला अब गुरुवार को आगे की सुनवाई के लिए आने की संभावना है। शपथ लेने वाले दिन ही आए इस बयान ने इस बात का शुरुआती संकेत दे दिया है कि मुख्य न्यायाधीश मिश्रा हाई कोर्ट में किस प्रकार का संस्थागत रुख अपनाने का इरादा रखते हैं।