हिसार: श्री आद्यशक्ति पीठ मां संतोषी आश्रम में चल रहा नौ दिवसीय नवरात्र महोत्सव व श्रीराम कथा हवन, कन्या पूजन, कीर्तन व भंडारे के साथ संपन्न हुए। हवन-यज्ञ करते हुए जहां जनकल्याण की कामना की गई, वहीं कीर्तन के माध्यम से प्रभु श्रीराम की स्तुति की गई। विधि-विधान के अनुसार कन्या पूजन करके उन्हें उपहार प्रदान किए गए। इसके उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धाभाव से भंडारे में लंगर प्रसाद ग्रहण किया।
   हिसार के मॉडल टाउन में स्थित मां संतोष आश्रम में आयोजित नौ दिवसीय नवरात्र महोत्सव व श्रीराम कथा में नौ दिनों तक लगातार विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। प्रतिदिन कथा व्यास श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर स्वामी संतोषी माता के सान्निध्य में विधि-विधान से पूजन व वैदिक विद्वानों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाया गया। स्वामी संतोषी माता ने प्रतिदिन श्रीराम कथा से जुड़े प्रसंगों का वर्णन करते हुए सदमार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
     मां संतोषी आश्रम की प्रबंधन कमेटी के संयोजक राजमल काजल ने बताया कि नवरात्र महोत्सव के अंतिम दिन कथा व्यास अनंत श्री विभूषित परम श्रद्धेय स्वामी संतोषी माता को समाजसेवी मधुर बसंल, भजन गायिका निशा दीदी, मुकेश गर्ग नलवा, जयप्रकाश जेपी, सुनीता अग्रवाल, वेद बंसल व कृष्णा गुप्ता ने माला अर्पित करके स्वागत-सत्कार किया।
 इस अवसर पर सुभाष बंसल, मदनलाल गोयल, सुशील बुड़ाकिया, अशोक बंसल, लोकनाथ सिंगल, रमेश चुघ, अनिल महता व मुकेश गर्ग सहित काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर स्वामी संतोषी माता ने आध्यात्मिक प्रवचन देते हुए समझाया कि भक्त का एक बार भगवान से नाता जुड़ जाए तो फिर वह अटूट बन जाता है। 
इसलिए प्रभु की भक्ति में मन लगाना चाहिए और उसके प्रति समर्पण भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नाता जुडऩे के बाद जीवन अपने आप कल्याणकारी हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस संसार रूपी वृक्ष का सार रूप परमात्मा ही है। इसलिए निष्काम भाव से परमात्मा का सिमरन करना चाहिए और यही कहना चाहिए कि मेरा सब कुछ परमात्मा ही है, ऐसा भाव रखने से देखिए जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आता है।
      मां संतोषी आश्रम में आठवें दिन की श्रीराम कथा के दौरान मां संतोषी आश्रम की प्रबंधन कमेटी के कोषाध्यक्ष लोकनाथ सिंगल ने तिलक करके स्वामी संतोषी माता का अभिनंदन किया और सुधीर जैन, पवन जांगड़ा, कौशल्या देवी, लीलूराम व उषा अत्री ने माला अर्पित करके स्वागत-सत्कार किया। इस अवसर पर अशोक बंसल, सुशील बुड़ाकिया, मुकेश गर्ग, रमेश चुघ, बिन्नू सेठी, सुभाष बंसल, सुनीता अग्रवाल, सुनीता गर्ग व कृष्णा गुप्ता सहित काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रीराम कथा को श्रवण किया। 
इस दौरान स्वामी संतोषी माता ने  कहा कि हमेशा सदकर्म करने चाहिए क्योंकि हर इंसान को कर्म का फल अवश्य भोगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को निरंतर ईश्वर से जुड़े रहने चाहिए और उसका स्मरण करते रहना चाहिए। ऐसा करने से ईश्वर की अनुकंपा अवश्य होती है।