नलखेड़ा/मध्य प्रदेश/होशियारपुर, 30 सितंबर:- मध्य प्रदेश के आगर-मालवा जिले के नलखेड़ा में लखुंदर नदी के पावन तट पर स्थित मां बगलामुखी मंदिर देश के प्रमुख बगलामुखी उपासना केंद्रों में विशेष स्थान रखता है। मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में पूजा जाता है और नलखेड़ा स्थित मंदिर लंबे समय से साधना, अनुष्ठान और श्रद्धा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है। मध्य प्रदेश सरकार के जिला प्रशासन की वेबसाइट भी मंदिर को लखुंदर नदी के तट पर स्थित प्राचीन धार्मिक स्थल बताते हुए इसकी द्वापर युग से जुड़ी मान्यता का उल्लेख करती है।

मंदिर के मुख्य पुजारी मनोहर दास पांडेय से वरिष्ठ संवाददाता दलजीत अज्नोहा की हुई विशेष बातचीत में मंदिर की प्राचीन परंपराओं, मां बगलामुखी की उपासना और नलखेड़ा धाम के धार्मिक महत्व से जुड़े अनेक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्य पुजारी मनोहर दास पांडेय के अनुसार, नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर की परंपरा को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन में महाराज युधिष्ठिर ने विजय की कामना से मां बगलामुखी की आराधना की थी। मंदिर के इतिहास से संबंधित सरकारी विवरण में भी यह मान्यता दर्ज है कि महाभारत युद्ध में विजय प्राप्त करने के उद्देश्य से भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर महाराज युधिष्ठिर ने यहां मां बगलामुखी की स्थापना की थी। मंदिर में स्थापित देवी की प्रतिमा को स्वयंभू मानने की परंपरा भी प्रचलित है।

मंदिर लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। नदी और मंदिर का प्राकृतिक परिवेश श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक आकर्षण रखता है। देश के विभिन्न हिस्सों से शैव और शाक्त परंपरा से जुड़े साधु-संत भी यहां साधना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पूजा-पाठ के साथ विशेष हवन और अनुष्ठानों की परंपरा भी देखने को मिलती है।

नलखेड़ा मंदिर की एक विशेष धार्मिक पहचान गर्भगृह में मां बगलामुखी के साथ मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की उपस्थिति से जुड़ी है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार केंद्रीय स्वरूप मां बगलामुखी का है, जबकि उनके साथ लक्ष्मी और सरस्वती का स्वरूप भी पूजित है। इस कारण इसे त्रिशक्ति स्वरूप की विशेष उपासना परंपरा से जोड़ा जाता है। मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण, भगवान हनुमान और भैरव की भी उपस्थिति बताई जाती है।

मां बगलामुखी को पीताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक परंपरा में उनका संबंध पीले रंग से माना जाता है। बगलामुखी साधना को विशेष रूप से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा, बाधाओं के निवारण और आत्मबल की कामना से जोड़ा जाता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा और धार्मिक विश्वास के अनुसार मां की पूजा-अर्चना करते हैं। विशेष अवसरों और नवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।

नलखेड़ा का यह मंदिर केवल दर्शन का केंद्र ही नहीं, बल्कि विशेष साधना और हवन परंपरा के लिए भी जाना जाता है। मंदिर के बारे में मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक विवरण में भी शैव और शाक्त साधकों के यहां पहुंचने तथा विशेष धार्मिक अनुष्ठानों की परंपरा का उल्लेख मिलता है। मुख्य पुजारी मनोहर दास पांडेय के साथ बातचीत में मंदिर की इसी साधना परंपरा और धार्मिक अनुशासन को लेकर भी चर्चा हुई। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर केवल मनोकामना पूर्ति का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, साधना और आध्यात्मिक शांति से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है।

मंदिर की वर्तमान संरचना और इसके लंबे धार्मिक इतिहास को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग विवरण मिलते हैं। कुछ स्रोत मंदिर के जीर्णोद्धार को 1815 से जोड़ते हैं, जबकि इसकी प्राचीनता और निर्माण को लेकर विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग दावे मिलते हैं। इसलिए मंदिर की हजारों वर्ष पुरानी आयु जैसे दावों को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के बजाय धार्मिक परंपरा और स्थानीय मान्यता के रूप में देखना अधिक उचित है। इसके बावजूद नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर आज मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

वरिष्ठ संवाददाता दलजीत अज्नोहा के साथ हुई विशेष बातचीत में मुख्य पुजारी मनोहर दास पांडेय ने मंदिर की परंपरा को केवल एक प्राचीन धार्मिक स्थल तक सीमित न मानते हुए इसे श्रद्धालुओं की आस्था और साधना से जुड़ा जीवंत केंद्र बताया। लखुंदर नदी का शांत वातावरण, मां बगलामुखी की उपासना, त्रिशक्ति स्वरूप की विशेषता और हवन-साधना की परंपरा नलखेड़ा धाम को विशिष्ट धार्मिक पहचान प्रदान करती है। यही कारण है कि समय के साथ मंदिर की लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की आस्था निरंतर बनी हुई है।

नलखेड़ा का मां बगलामुखी मंदिर इस प्रकार इतिहास, धार्मिक मान्यता, साधना और लोक आस्था के संगम के रूप में आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है।