होशियारपुर:- क्यों मनाया जाता है रेड क्रॉस दिवस?
 विश्व रेड क्रॉस दिवस हर साल 8 मई को रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति   के संस्थापक जीन हेनरी ड्यूनेन्ट के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1863 में हुई थी। ड्यूनेन्ट ने युद्ध के मैदान में घायल सैनिकों की दुर्दशा देखकर इस निष्पक्ष संस्था की नींव रखी थी। यह दिवस मानवता की सेवा, रक्तदान को प्रोत्साहित करने और प्राकृतिक आपदाओं या युद्ध के दौरान बिना किसी भेदभाव के लोगों की जान बचाने वाले स्वयंसेवकों  के जज्बे को सलाम करने के लिए मनाया जाता है।
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी), तलवाड़ा की रेड क्रॉस संस्था महिलाओं के सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा रही है। बीबीएमबी रेड क्रॉस संस्था द्वारा चलाए जा रहे सिलाई-कढ़ाई केंद्र में महिलाएं जहां आत्मनिर्भरता का हुनर सीख रही हैं, वहीं छोटे बच्चों की देखभाल की व्यवस्था कामकाजी महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है।
मुख्य अभियंता राकेश गुप्ता के मार्गदर्शन में संस्था द्वारा उपरोक्त कार्यों के अलावा समय-समय पर समाज कल्याण के कार्य किए जाते हैं और वार्षिक रेड क्रॉस मेला भी आयोजित किया जाता है।
संस्था की चेयरपर्सन सीमा गुप्ता बताती हैं कि बीबीएमबी रेड क्रॉस संस्था अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए सिलाई-कढ़ाई केंद्र चला रही है। वर्तमान में इसमें 17 महिलाएं सिलाई-कढ़ाई सीख रही हैं। यहां उनके लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण देने वाली इंस्ट्रक्टर की व्यवस्था की गई है। सिलाई-कढ़ाई संबंधी 1 वर्ष का कोर्स पूरा करने पर बीबीएमबी रेड क्रॉस संस्था द्वारा प्रमाणपत्र भी दिया जाता है। इसके लिए प्रवेश शुल्क 50 रुपये और मासिक शुल्क केवल 100 रुपये है। यहाँ से सिलाई-कढ़ाई का काम सीखकर ये महिलाएं अपना स्वयं का कार्य शुरू करने के योग्य हो जाती हैं।
संस्था के सचिव डिंपल कहते हैं कि इसके अतिरिक्त 'शिशु निकेतन' भी चलाया जा रहा है, जहाँ 2 से 3 वर्ष के छोटे बच्चों की दिन के समय देखभाल की जाती है। कामकाजी महिलाओं को इसकी बहुत सुविधा है; वे अपने काम पर जाते समय बच्चों को यहाँ छोड़ जाती हैं। इसका भी प्रवेश शुल्क 50 रुपये है, जबकि 30 हजार तक की आय वालों के लिए मासिक शुल्क 250 रुपये और 30 हजार से अधिक आय वालों के लिए 300 रुपये है।
रेड क्रॉस मैनेजर नरदेव सिंह का कहना है कि संस्था के ये प्रयास समाज को अच्छे परिणाम दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कामकाजी महिलाओं के लिए दिन के समय अपने छोटे बच्चों की देखभाल एक चुनौती होती है, लेकिन शिशु निकेतन इसमें उनकी मदद करता है। उन्होंने बताया कि यहाँ बच्चों को मिड-डे मील भी दिया जाता है और महीने में दो बार बीबीएमबी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा मेडिकल चेकअप भी किया जाता है।