पटियाला, 15 जुलाई:- अपनी सेवाओं को ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग में विलय करके पक्का करवाने और 6 से 8 महीने का बकाया वेतन जारी करने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे मनरेगा कर्मचारियों का आज यहां पंचायत मंत्री तरुनप्रीत सिंह सोंद के आवास के बाहर धरना था। पुलिस प्रशासन को इसकी लिखित जानकारी पहले ही भेज दी गई थी। मनरेगा कर्मचारी यूनियन ने मीडिया के माध्यम से और सीनियर पुलिस कप्तान मैडम दर्पण अहलूवालिया से मिलकर धरने की सूचना दे दी थी।
आज जब मनरेगा कर्मचारी म्यूनिसिपल पार्क में इकट्ठे हुए तो भीड़ बहुत अधिक होने के कारण व्यवस्था की कमी हो गई। कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की कि इस मसले का कोई समाधान किया जाए। जब कोई भी प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पर नहीं पहुंचा, तो यूनियन ने 30 मिनट का समय देकर मार्च करने और पंचायत मंत्री की कोठी के आगे धरना लगाने का ऐलान किया। जब धरनाकारी मार्च करते हुए मंत्री के आवास की ओर बढ़े, तो प्रशासन ने बैरियर लगाकर उन्हें रोक लिया। कर्मचारियों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। एक घंटे के इंतजार के बाद गर्मी के कारण कुछ कर्मचारी बेहोश हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यूनियन ने प्रशासन से पीने के पानी और छाया की मांग की, लेकिन मौके पर मौजूद उप पुलिस कप्तान (DSP) ने मना कर दिया। इस पर यूनियन ने मांग की कि उन्हें कॉलोनी में बने पार्क में बैठ जाने दिया जाए क्योंकि सड़क पर बैठना संभव नहीं था। जब पुलिस प्रशासन ने कोई बात नहीं सुनी, तो मनरेगा कर्मचारी बैरीकेट हटाकर कॉलोनी में दाखिल होने लगे। इसके बाद उन पर खतरनाक तरीके से लाठीचार्ज किया गया। पानी की बौछारें छोड़ी गईं और आंसू गैस के गोले दागे गए।
इस घटना में फतेहगढ़ साहिब के कर्मचारी सुधागर सिंह की टांग दो जगह से टूट गई। दर्जन भर से अधिक कर्मचारी घायल हो गए जिन्हें साथी कर्मचारी मुश्किल से अस्पताल ले गए। बाद में टांग की गंभीर स्थिति को देखते हुए सुधागर सिंह को मोहाली रेफर कर दिया गया। बड़ी संख्या में कर्मचारी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। जन संगठनों के संयुक्त मोर्चे के नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि लाठी-गोली किसी मसले का हल नहीं है। बेहतर होता कि सरकार उनके साथ बैठकर बात करती। दर्शन बेलू माजरा, जसविंदर सिंह सौजा, लखविंदर सिंह खानपुर समेत अन्य नेताओं ने कहा कि वे इस घटना की कड़ी निंदा करते हैं और सरकार को चेतावनी देते हैं कि यह रास्ता विनाश की ओर ले जाता है। सरकार को चाहिए कि वह खोखले ड्रामे छोड़कर संघर्षरत लोगों से बातचीत करे और मसलों का गंभीरता से हल निकाले। नेताओं ने दोहराया कि वे पहले भी इन कर्मचारियों का समर्थन करते रहे हैं और आगे भी उनकी मदद करेंगे।
मनरेगा कर्मचारियों पर किया गया लाठीचार्ज अत्यंत निंदनीय लाठीगोली से जन आंदोलनों को नहीं दबाया जा सकता
