रतिया 17 नवंबर:- खालसा त्रिशताब्दी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रतिया में श्री गुरु तेग बहादुर सिंह के बलिदान दिवस पर राज्यस्तरीय सेमिनार का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ मंगल सिंह, सेवानिवृत्त सहायकाचार्य ने की जबकि मुख्य वक्ता के रूप में प्रो जगमोहन सिंह विर्क, राजकीय महाविद्यालय भेरियां कलां,कुरुक्षेत्र ने शिरकत की।
इस सेमिनार में प्रो रोहित कुमार, सहायकाचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय, भोडिया खेड़ा और प्रो जसपाल सिंह, सहायकाचार्य, राजकीय महाविद्यालय, कालांवाली ने गुरू तेग बहादुर जी के संबंध में शोध पत्र प्रस्तुत किये । इस सेमिनार के प्रारंभ में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ सुमित्रा सांगवान ने इस कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों का स्वागत किया। जिसके पश्चात
मुख्य वक्ता प्रो जगमोहन सिंह विर्क ने अपने संबोधन में बताया कि गुरू तेग बहादुर जी शहीदी, ज्ञान और कर्म का सुमेल थे ।
तेग बहादुर जी का वास्तविक नाम त्याग मल था परंतु उन्होंने एक लड़ाई में इतनी बहादुरी व कुशलता से तलवार चलाई कि उनके पिता गुरू हर गोबिंद जी ने उन्हें तेग बहादुर की उपाधि से नवाजा ।उनकी बाणी के बारे में चर्चा करते हुए मुख्य वक्ता ने बताया कि जंग बहादुर होने के साथ- साथ गुरू तेग बहादुर जी संगीत व साहित्य प्रेमी रहे ।उन्होंने 15 रागों में बाणी की रचना की, 57 श्लोकों व 59 नए शब्दों की रचना की । उनकी बाणी से पता चलता है कि वे गम्भीर चिन्तक व मनोविश्लेषक व समाज सुधारक थे । उनकी बाणी मानवतावादी है ।उन्होंने लोगों को होमें अर्थात आत्म मुग्धता से बचने का संदेश देते हुए सम्पूर्ण मानवता में विश्वास रखने की प्रेरणा दी ।वे तन, मन व आत्मिक मुक्ति के समर्थक थे । उन्होंने देखा कि मुग़लों की ग़ुलामी के चलते आम जनता शारीरिक रूप से तो गुलाम थी ही , मानसिक रूप से भी गुलाम हो चुके थे । डर उनके दिलो- दिमाग में इस कदर बैठ चुका था कि वे विद्रोह के बारे में सोच ही नहीं सकते थे ।उन्हें समझाना बहुत मुश्किल था । इस माहौल में उन्होंने तानाशाही मुग़ल सत्ता का विरोध करते हुए आम जन में विद्रोह की भावना पैदा करने का बीड़ा उठाया जिसकी पराकाष्ठा तब आई जब उन्होनें हँसते हँसते दिल्ली के चांदनी चौक में अपनी शहीदत दी । उनके बलिदान ने आमजन में नहीं ऊर्जा का संचार कर दिया तथा उनमें क्रान्ति की भावना भर दी जिससे मुग़ल साम्राज्य की नींव हिल गयी ।
इस कार्यक्रम की प्रधानगी कर रहे डॉ मंगल सिंह ने गुरू तेग बहादुर जी के जीवन के उन पक्षों पर प्रकाश डाला जिनके बारे में अधिकतर लोग अनभिज्ञ हैं। उन्होंने बताया कि किस प्रकार तेग बहादुर जी के मन में कौम और देश के प्रति भक्ति की भावना पैदा हुई।
प्रो रोहित कुमार व प्रो जसपाल सिंह ने अपने अपने शोध पत्रों के माध्यम से श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। इस सेमिनार के अन्त में महाविद्यालय के पंजाबी विभागाध्यक्ष डॉ बीरबल सिंह व प्रो सर्वजीत सिंह ने इस कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों का धन्यवाद किया।
खालसा त्रिशताब्दी कालेज में श्री गुरु तेग बहादुर के 350 वें शहीदी दिवस पर राज्यस्तरीय सेमिनार का आयोजन
