जालंधर:- कार्ल मार्क्स के 208वें जन्म दिवस के अवसर पर देश भक्त यादगार कमेटी द्वारा 'आज के समय में मार्क्सवाद की प्रासंगिकता' विषय पर आयोजित चर्चा में यह निष्कर्ष निकाला गया कि पूंजीवाद के चरम चरण 'साम्राज्यवाद' ने पूरी तरह से नग्न होकर दुनिया के सामने अपना लुटेरा, युद्धोन्मादी और फासीवादी चेहरा उजागर कर दिया है। इसके खिलाफ वैश्विक मंच पर जन-विरोध भी सामने आ रहा है।
चर्चा के शुरुआती शब्द बोलते हुए देश भक्त यादगार कमेटी के महासचिव गुरमीत सिंह ने कहा कि समाज को जकड़े हुए चौतरफा रोगों का इलाज केवल मार्क्सवादी विज्ञान के पास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह इलाज कोई स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं है; इसके लिए समाज की परिवर्तनकारी शक्तियों को अपनी सचेत भूमिका निभाने के लिए आगे आने की आवश्यकता है। महासचिव ने इस बात पर बल दिया कि ऐसी चर्चाओं के सिलसिले को निरंतर जारी रखना समय की मांग है।
'आज के समय में मार्क्सवाद की प्रासंगिकता' विषय पर अपना भाषण केंद्रित करते हुए लेखक, अनुवादक और लोकतांत्रिक अधिकारों के आंदोलन के जाने-माने ध्वजवाहक बूटा सिंह महमूदपुर ने कहा कि कार्ल मार्क्स का जन्म दिवस, मजदूर वर्ग के प्रभुत्व वाले नए समाज के सृजन का जन्म दिवस है। मार्क्स ने यह बिंदु उभारा कि पूंजीवाद अपने वजूद के भीतर समाहित अंतर्विरोधों के कारण निरंतर संकट में घिरा रहता है। भले ही यह ढोल पीटा जाता है कि पूंजीवादी व्यवस्था शाश्वत है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसके भीतर ही इसकी अपनी कब्र खोदे जाने के लक्षण मौजूद हैं।
ऐतिहासिक तथ्यों और वर्तमान वास्तविकताओं का हवाला देते हुए बूटा सिंह महमूदपुर ने कहा कि क्रांतिकारी सामाजिक परिवर्तन के लिए मार्क्सवादी दर्शन आज भी सर्वश्रेष्ठ राजनीतिक धारा है। उन्होंने अपने भाषण में यह पक्ष प्रमुखता से रखा कि ऊपर से मजबूत होने की हुंकार भरती वर्तमान लोक-विरोधी व्यवस्था मार्क्सवादी चिंतन की दृष्टि में अंदर से खोखली है।
यह अपने अस्तित्व के लिए युद्धों और फासीवादी हमलों का सहारा लेकर हाथ-पांव मारती है, जिसके परिणामस्वरूप यह और भी गहरे संकटों में घिरती जा रही है। अंत में, उन्होंने कहा कि अनेक समस्याओं से घिरी विश्व व्यवस्था के लिए मुक्ति, खुशहाली, प्रगति, समानता और शांति का मार्गदर्शक केवल मार्क्सवादी वैज्ञानिक विचारधारा ही है।
इस अवसर पर मास्टर मदन लाल बुल्लोवाल, डॉ. जगजीत सिंह चीमा, मंगत राम पासला, डॉ. शैलेश, अमीश बागपुर, अमरीक सिंह आर.सी.एफ., केसर, रमेश चौहका और प्रो. केवल कलोटी ने भी अपने विचार रखे। चर्चा में स्पष्ट रूप से कहा गया कि पूंजीवाद और नव-उदारवाद जैसी सभी रणनीतियां विफल हो रही हैं। पूंजीवादी व्यवस्था स्थायी नहीं रह सकती। इसके चंगुल को तोड़ने के लिए सचेत वर्गीय जागरूकता, नए सिरे से क्रांतिकारी आंदोलन का निर्माण और नई व्यवस्था के सृजन के लिए निर्मम वर्गीय संघर्ष अनिवार्य है।
सांस्कृतिक विंग के संयोजक अमोलक सिंह ने कहा कि देश के गंभीर और चिंताजनक हालातों के बीच यह सम्मान देश भक्त यादगार कमेटी को जाता है, जो घोर अंधेरे की परवाह किए बिना धरती पर 'रंगीन सुबह' लाने के लिए समय-समय पर 'मार्क्सवाद की प्रासंगिकता' जैसे उपयुक्त मुद्दों पर संवाद कर रही है।
देश भक्त यादगार कमेटी के उपाध्यक्ष डॉ. परमिंदर सिंह ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि आज का अर्थपूर्ण समागम यह आशा जगाता है कि भविष्य में ऐसी चर्चाओं का सिलसिला जारी रहना चाहिए। कार्यक्रम का मंच संचालन कमेटी सदस्य और सांस्कृतिक विंग के संयोजक अमोलक सिंह ने किया।
कार्ल मार्क्स जन्म दिवस समारोह मार्क्सवादी विचारधारा क्रांतिकारी सामाजिक परिवर्तन के लिए आज भी प्रासंगिक बूटा सिंह महमूदपुर
