हिसार, 19 मार्च:- दिव्यांग एकाधिकार पुनर्वास ट्रस्ट द्वारा दिग्विजय मेमोरियल स्कूल, कैमरी में मानसिक स्वास्थ्य व कौशल विकास पर शिक्षक प्रशिक्षण विषय पर महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना तथा उनके जीवन कौशल के विकास हेतु प्रभावी तकनीकों से अवगत कराना था। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने शिक्षकों को विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव, चिंता, अवसाद एवं व्यवहारिक समस्याओं की पहचान करने तथा उन्हें उचित मार्गदर्शन प्रदान करने के व्यावहारिक उपाय बताए।
साथ ही, निर्णय लेने की क्षमता, समस्या समाधान, संचार कौशल, आत्म-जागरूकता एवं भावनात्मक संतुलन जैसे महत्वपूर्ण जीवन कौशलों पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर दिव्यांग एकाधिकार पुनर्वास ट्रस्ट के संयोजक राजपाल सिंह बासनीवाल ने अपने विस्तृत संबोधन में कहा कि आज के समय में शिक्षा का अर्थ केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह गया है। बच्चों का मानसिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और भावनात्मक रूप से संतुलित होना अत्यंत आवश्यक है।
वर्तमान जीवनशैली और प्रतिस्पर्धा के कारण बच्चों में तनाव, चिंता और व्यवहारिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिन्हें समय रहते पहचानना और सही दिशा देना बेहद जरूरी है। मेंटल हेल्थ का सीधा सम्बंध बच्चे के सीखने, सोचने और व्यवहार करने की क्षमता से होता है। यदि बच्चा मानसिक रुप से स्वस्थ होगा, तो वह अपने लक्ष्य को स्पष्ट रुप से समझ पाएगा और जीवन की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ करेगा।
इसके साथ ही, जीवन कौशल जैसे निर्णय लेने की क्षमता, समस्या समाधान, प्रभावी संचार, आत्म-जागरुकता और भावनात्मक नियंत्रण बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में होते हैं। वे न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि बच्चों के मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी होते हैं।
इसलिए शिक्षकों को समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण दिए जाना अत्यंत आवश्यक है, जिससे वे बच्चों की मानसिक और भावनात्मक जरुरतों को बेहतर ढंग से समझ सकें और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ा सकें।
विद्यालय की प्राचार्या परसल बिश्नोई ने अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए शिक्षकों का जागरुक और संवेदनशील होना बहुत आवश्यक है। इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों को नई दिशा और बेहतर समझ प्रदान करती हैं, जिससे वे बच्चों के विकास में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।
प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण, समूह चर्चा, भूमिका निर्वाह एवं केस स्टडी जैसी विधियों का उपयोग किया गया, जिससे शिक्षकों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ और वे इन तकनीकों को अपने विद्यालय में प्रभावी रुप से लागू कर सकें।
इस अवसर पर ट्रस्ट की ओर से डॉ. शिवांशी (मनोवैज्ञानिक), कनुप्रिया, रुचि शर्मा एवं अरुण उपस्थित रहे, वहीं विद्यालय के स्टाफ सदस्य दिनेश, सुमित्रा, प्रीत, मोनका, मीना, दीपिका, प्रिया, कविता, गुंजन, रिया ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बच्चों का मानसिक रुप से मजबूत आत्मनिर्भर व भावनात्मक रुप से संतुलित होना अत्यंत आवश्यक राजपाल बासनीवाल
