होशियारपुर:- पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने से सांस लेने वाली हवा में ऑक्सीजन की मात्रा घटेगी और तापमान में वृद्धि निश्चित होगी। वैश्विक स्तर पर वातावरण के प्रति देशों ने तापमान को 2 डिग्री से 1.5 डिग्री तक घटाने का वचन दिया है और देश में विमान से उतरने के बाद वातावरण की रक्षा के लिए नीतियाँ बनानी चाहिएं, पर वे शानदार नीतियाँ बनाने व लागू करने में सहमति नहीं दिखा रहे। 
इस संबंध में लेबर पार्टी के अध्यक्ष जै गोपाल धीमान ने सरकारों की स्वार्थी सोच और अनदेखी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि तापमान घटाने और कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने के लिए लोगों और सरकारों को सख्त फैसले लेने होंगे। गेहूँ की नाड़ जलाने से दुनिया को वह नुकसान होता है जिसकी भरपाई मनुष्य कभी नहीं कर सकता। 
जो धरती किसान को फल-फूल कर रखती है, आज उसी धरती माँ का नुकसान किया जा रहा है। यह कोई बहादुरी नहीं है; आग को रोका जा सकता है और धरती की उपजाऊ शक्ति को बचाया जा सकता है। कितने जानवर मरते हैं और पर्यावरण में गर्मी बढ़ती है और घटनाएँ पुनः होती हैं। मिट्टी तो सूख कर बंजर हो जाती है — यह नाड़ है। 
हर रोज गुरुद्वारों में हम यह आवाज सुनते हैं कि “पवन गुरु—पानी पिता और माता धरती” — जो इंसान हवा, पानी और धरती का महत्व नहीं समझता वह अज्ञानता में है। दुख की बात यह है कि इंसान खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहा है। जब फिर प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है तो इंसान रब रब कर भटकता है। धीमान ने कहा कि वातावरण से बड़ा कुछ भी नहीं और न ही हो सकता है।
 प्राकृतिक संतुलन बनाए रखना सरकारों का फर्ज है, पर वे पैसे की लालच में फँस कर अपनी ही बर्बादी नहीं कर रहीं बल्कि देश की आर्थिक नीतियाँ भी तबाह करवा रही हैं। फिर किसान की फसल पूरी तरह प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर करती है। प्रकृति के चक्र को जानने और समझने की सख्त जरूरत है। कितना शर्मनाक है कि पंजाब का वातावरण मंत्रालय तबाही को देखकर चुप बैठा है।
धीमान ने कहा कि वातावरण के संबंध में पेड़ों के प्रति ईमानदार होना होगा, धरती को हरियाली से ढकना होगा और उनकी मौजूदगी को हर हाल में समझना होगा। लग रही सारी आगों को बंद करना होगा। पेड़ों से सरकारी आय जुटाने के सारे साधन बंद करने पड़ेंगे और खाली पड़ी पंचायत की जमीनों और खेती बंद करके जंगलों को फिर से पैदा करना होगा। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड घटाने के साथ-साथ ऑक्सीजन भी मुहैया करवाते हैं। 
धीमान ने कहा कि सिर्फ पंजाब की ही नहीं पूरे देश की पंचायतों और साझा रक्वियों पर ग्रीन जंगल पैदा करने के लिए जागरूक होना पड़ेगा। सरकारी आय के साधन केवल कर नीतियाँ होने चाहिए, न कि पेड़ों की कटाई। वातावरण के प्रति ढकोसला और झूठ का पूरा परित्याग करना होगा। सड़कों के आसपास स्ट्रिप फॉरेस्ट का पुनर्विकास करना होगा। 
उन्होंने कहा कि देश में किसी चीज की कोई कमी नहीं, अगर है तो सिर्फ सच्चाई और लगन की कमी है। लोग बहुत कुछ कर सकते हैं। अगर लोग इंकलाब ला सकते हैं तो फिर वातावरण में सुधार क्यों नहीं कर सकते? धीमान ने कहा कि होशियारपुर जिला () कभी पेड़ों का अग्रिणी जिला रहा है। पर वन विभाग और राजनेताओं में फैला भ्रष्टाचार पंजाब के कुछ इलाकों को फिर रेगिस्तान बना चुका है, जिसके परिणाम आज हमारे सामने दिख रहे हैं। 
जैसे बेरोजगारी पर भारी बोझ है, उसी तरह पेड़ों पर भी भारी बोझ पड़ रहा है। एक दिन भारत के लोग पेड़ों की पूजा किया करते थे और अब वही खराब हालात के कारण पेड़ों की संख्या घटाने में अपने-अपने राजनेताओं के साथ मिल कर उजाड़ करने में लगे हुए हैं। धीमान ने लोगों से वातावरण के प्रति जागरूक होने की अपील की।