करनाल, 1 जुलाई: हरियाणा कारागार विभाग द्वारा बंदियों के पुनर्वास, कौशल विकास एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं दूरगामी पहल करते हुए आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई), करनाल के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह समझौता एनडीआरआई के 104वें स्थापना दिवस के अवसर पर आज करनाल मैं आयोजित विशेष समारोह के दौरान संपन्न हुआ। महानिदेशक कारागार, हरियाणा आलोक मित्तल, आईपीएस के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में प्रारंभ की गई इस पहल का उद्देश्य बंदियों को वैज्ञानिक पशुपालन, डेयरी फार्मिंग, दुग्ध प्रसंस्करण तथा डेयरी उद्यमिता का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें भविष्य के लिए आत्मनिर्भर बनाना है। समझौता ज्ञापन पर एनडीआरआई की ओर से संस्थान के निदेशक डॉ धीर सिंह तथा जिला जेल करनाल की ओर से अधीक्षक जेल लखबीर सिंह बराड़ ने राज्यसभा सांसद संजय भाटिया की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। समझौते के अंतर्गत जिला जेल करनाल में स्थापित डेयरी इकाई के माध्यम से बंदियों को चरणबद्ध प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण में पशुओं की देखभाल, पोषण एवं प्रबंधन, विभिन्न दुधारू नस्लों की पहचान, स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, दूध से मूल्यवर्धित उत्पादों जैसे घी, पनीर, दही, मक्खन एवं अन्य दुग्ध उत्पादों का निर्माण तथा डेयरी आधारित स्वरोजगार के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम के प्रथम चरण में जिला जेल करनाल की अर्ध-खुली व खुली जेल जिनका करनाल (Semi-Open and Open Jail) में निरुद्ध ऐसे बंदियों का चयन किया जाएगा आचरण संतोषजनक रहा है तथा जो रिहाई के उपरांत स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसरों का लाभ उठाने के इच्छुक हैं। इन चयनित बंदियों को एनडीआरआई द्वारा तीन माह का संरचित व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला जेल, करनाल परिसर मैं चलाया जाएगा, जिसमें वैज्ञानिक पशुपालन डेयरी प्रबंधन, दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धित दुग्ध उत्पादों का निर्माण तथा डेयरी उद्यमिता से संबंधित व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक ज्ञान उपलब्ध कराया जाएगा।6. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद श्री संजय भाटिया ने हरियाणा कारागार विभाग एवं एनडीआरआई की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की प्रत्येक जेल में इस प्रकार की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने हेतु पाँच-पाँच लाख रुपये की अनुदान राशि प्रदान करने की घोषणा भी की।
एनडीआरआई के निदेशक डॉ धीर सिंह ने कहा कि यह परियोजना उनके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा संस्थान इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु हरसंभव तकनीकी एवं प्रशिक्षण सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल बंदियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनेगी। हरियाणा कारागार विभाग द्वारा संचालित यह कार्यक्रम सुधारात्मक प्रशासन की उस सोच को साकार करता है. जिसके अंतर्गत बंदियों को केवल निरुद्ध रखने के बजाय उन्हें कौशलयुक्त, आत्मनिर्भर एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने पर बल दिया जाता है। विभाग का मानना है कि इस प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों को रिहाई के पश्चात सम्मानजनक रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराएंगे, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के स्क्र्थ-साथ समाज एवं राष्ट्र के विकास में भी सकारात्मक योगदान दे सकेंगे।
हरियाणा कारागार विभाग एवं एनडीआरआई करनाल की अभिनव पहल बंदियों को मिलेगा पशुपालन एवं डेयरी उद्यमिता का प्रशिक्षण
