रतिया, 26 जून:- गुरुद्वारा श्री अजीतसर साहिब, रतिया में अकाल पंथक मोर्चा की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रकाश सिंह साहूवाला की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य जत्थेदार इकबाल सिंह खोखर, जत्थेदार काका सिंह लद्धूवास, गुरमेल सिंह सहिनाल, करमजीत सिंह सालमखेड़ा, गुरमेज सिंह सिरसा, अमृतपाल सिंह औडां, सुखदेव सिंह ननियोला (अंबाला) सहित बड़ी संख्या में सिख पंथ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देशभर में सिख समुदाय के साथ हो रही कथित ज्यादतियाँ गंभीर चिंता का विषय हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सचखंड श्री हज़ूर साहिब से संबंधित वर्ष 1956 के अधिनियम में सरकार द्वारा किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप या संशोधन सिख समुदाय को स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे प्रयासों का सिख संगतों ने लोकतांत्रिक ढंग से विरोध किया था, जिसके चलते सरकार को अपने निर्णय वापस लेने पड़े थे।
अकाल पंथक मोर्चा के नेताओं ने कहा कि किसी भी राज्य सरकार को गुरुद्वारों के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने सिख संगत से अपील की कि यदि भविष्य में गुरुघरों पर कोई सरकारी आदेश या हस्तक्षेप थोपने का प्रयास किया जाता है तो पूरे समुदाय को एकजुट होकर उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना चाहिए। बैठक में महाराष्ट्र सरकार द्वारा वर्ष 1956 के अधिनियम से संबंधित लिए गए निर्णय का भी जोरदार विरोध किया गया।
बैठक के दौरान श्री हेमकुंट साहिब यात्रा पर जाने वाले सिख श्रद्धालुओं के साथ कथित रूप से किए जा रहे दुर्व्यवहार पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। नेताओं ने कहा कि यदि किसी निर्दोष सिख यात्री के विरुद्ध मामले दर्ज किए गए हैं तो स्थानीय प्रशासन उन्हें तुरंत वापस ले तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करे।
बैठक में लुधियाना में कुछ शिवसेना नेताओं द्वारा सिख गुरुओं, सिख संस्थाओं तथा सिख समुदाय के प्रति कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं और टकराव का माहौल पैदा कर सकते हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि ऐसे शरारती तत्वों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो इसके लिए प्रशासन और सरकार जिम्मेदार होंगे।
अंत में अकाल पंथक मोर्चा के नेताओं ने समस्त सिख संगत से कौमी हितों की रक्षा, गुरुघरों की मर्यादा तथा उनकी स्वायत्तता बनाए रखने के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।