चंडीगढ़:- शिरोमणि अकाली दल के सीनियर नेताओं जत्थेदार इकबाल सिंह झूंदां, जत्थेदार संता सिंह उमेदपुर और सरदार बरजिंदर सिंह बराड़ ने उप राष्ट्रपति चुनाव के लिए हरसिमरत कौर बादल के बॉयकॉट को सियासी जुमलेबाजी करार दिया है। जत्थेदार इकबाल सिंह झूंदां ने जारी बयान में कहा कि, जब राष्ट्रपति की चुनाव के समय सरदार मनप्रीत सिंह इयाली द्वारा सूबे और पंथ के हित में पार्टी लीडरशिप के फैसले के खिलाफ जाकर अपनी नैतिकता के आधार पर बॉयकॉट किया गया था।
 तब उस समय सरदार इयाली को पार्टी के विरोधी विधायक के रूप में बताने वाला बादल दल आज बाढ़ों का बहाना बनाकर अपने बॉयकॉट को किस तरह सही दर्शा रहा है जबकि राष्ट्रपति के चुनाव के समय पंजाब के हितों को भुलाकर वोट डाले गए थे क्या उस समय बादल दल सही था या आज बॉयकॉट करके सही है। जत्थेदार इकबाल सिंह झूंदां ने कहा कि, बादल दल केंद्र सरकार में साझेदारी के समय ना सियासी तौर पर सूबे के हित को पेश कर सका और ना ही केंद्र सरकार से जुड़े पंथक मुद्दों की तरजमानी कर सका।
 इन दोनों बड़े मुद्दों पर ठोस स्टैंड लेने की बजाय पंजाब की स्थिति को बहाने के रूप में इस्तेमाल करना, साबित करता है कि पंथ और पंजाब के मुद्दों पर अलग-अलग समयों पर और अलग-अलग मुद्दों पर अपना स्टैंड स्पष्ट न करना यह दर्शाता है कि फैसले नीतिगत नहीं हैं। ये अलग-अलग समयों पर बदलते राजसी समीकरणों को मुख्य रखकर लिए गए फैसले हैं। 
इसके साथ जत्थेदार संता सिंह उमेदपुर ने कहा कि, अच्छा होता उप राष्ट्रपति के चुनाव के समय बादल धड़ा, प्राकृतिक आपदा को बहाने के रूप में इस्तेमाल करने की बजाय वैचारिक रूप, केंद्र से जुड़े बड़े मसलों के आधार और सूबे के ज्यादा हितों को मुख्य रखकर अपनी वोट के बॉयकॉट का ऐलान करता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, सत्ता के लिए तरस रहा बादल खेमा, सत्ता के लालच के नीचे पंथ और पंजाब के मुद्दों को पूरी तरह भुला चुका है। 
बीजेपी के साथ दोबारा साझेदारी के लालच के नीचे आज राजनीति का वही पुराना हथियार बादल धड़े ने इस्तेमाल किया है, जिसमें बॉयकॉट का रास्ता चुनकर, सियासी फायदे देने की मंजिल की ओर बढ़ना होता है। सरदार बरजिंदर सिंह बराड़ ने हरसिमरत कौर बादल के बॉयकॉट को मौकापरस्त राजनीति का हिस्सा बताया है।