नई दिल्ली, 23 अप्रैल- मैक्स अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. टी.एस. क्लेर ने कहा है कि हार्ट फेलियर एक डरावना शब्द है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में प्रगति ने इसे काफी हद तक नियंत्रित कर लिया है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, समय पर देखभाल, जीवनशैली में बदलाव और चिकित्सकीय सलाह से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और अच्छा जीवन जिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हार्ट फेलियर जिसे कंजेस्टिव हार्ट फेलियर भी कहते हैं, में हृदय शरीर की जरूरत के हिसाब से रक्त को प्रभावी ढंग से पंप नहीं कर पाता। इसका मतलब यह नहीं है कि हृदय ने काम करना बंद कर दिया है, लेकिन यह पहले जितना प्रभावी नहीं रह जाता। इस स्थिति के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें कोरोनरी धमनी रोग, उच्च रक्तचाप, पहले हो चुके हृदयाघात, हृदय वाल्व रोग, संक्रमण या आनुवांशिक कारण सबसे आम कारण हैं।
इसके लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, थकान, पैरों या टखनों में सूजन, दिल की धड़कन तेज होना और लगातार खांसी आना शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि हार्ट फेलियर की स्थिति को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन इसे बहुत प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उचित उपचार और जीवनशैली में बदलाव के साथ कई लोग लंबी और सक्रिय जिंदगी जी रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मरीज को नमक का सेवन कम करना चाहिए, तरल पदार्थों के सेवन पर नजर रखनी चाहिए, शराब और धूम्रपान से बचना चाहिए, रोजाना अपना वजन जांचना चाहिए, डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्यायाम करना चाहिए, रक्तचाप और शुगर को नियंत्रित रखना चाहिए और स्वस्थ आहार लेना चाहिए।
समय पर देखभाल और जीवनशैली में बदलाव से हृदय रोग पर काबू पाया जा सकता है- डॉ. टी.एस. क्लेर
