जालंधर, 13 मार्च:- जालंधर–फगवाड़ा हाईवे पर स्थित कृष्णा रिजॉर्ट्स से जुड़े लगभग दस साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) हरप्रीत कौर की अदालत ने प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट गुरचरण सिंह स्याल को बरी करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पर्याप्त सबूतों की कमी के आधार पर स्याल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि शिकायतकर्ता आरोपों को साबित करने में असफल रहा है। स्याल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील दरशन सिंह दयाल ने बताया कि यह मामला एम/एस कृष्णा रियल एस्टेट एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, जो एमबीडी ग्रुप से जुड़ा है, से संबंधित था। वर्ष 2016 में स्याल के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 465, 466 और 468 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
मामले की बारीकी से जांच करने के बाद अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि डायरेक्टर के रूप में स्याल द्वारा हस्ताक्षरित वकालतनामा में कोई जालसाजी हुई थी, या उनके पास शुरू से धोखाधड़ी का कोई इरादा था, अथवा शिकायतकर्ता को कोई वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया था।
जिरह के दौरान शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि वह न तो कंपनी का डायरेक्टर था और न ही कर्मचारी, इसलिए उसके पास यह आपराधिक मामला दर्ज कराने का कोई अधिकार नहीं था। अदालत ने यह भी पाया कि स्याल द्वारा कंपनी को कोई वित्तीय नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
फैसले में जांच प्रक्रिया की कई कमियों की ओर भी संकेत किया गया। अदालत ने यह भी पाया कि एमबीडी ग्रुप की मुख्य कंपनी की डायरेक्टर सतीश बाला मल्होत्रा, सोनिका मल्होत्रा और मोनिका मल्होत्रा ने कभी पुलिस के सामने गवाही नहीं दी और न ही उनके बयान जांच अधिकारी द्वारा धारा 161 सीआरपीसी के तहत दर्ज किए गए।
अदालत ने यह भी कहा कि कंपनी लॉ बोर्ड ने अपने आदेशों में गुरचरण सिंह स्याल के डायरेक्टर पद की स्थिति को बरकरार रखा था, और अदालत की कार्यवाही के दौरान भी उन्हें डायरेक्टर के रूप में ही संबोधित किया जाता था। उन्होंने कंपनी की मोहर या वकालतनामा पर हस्ताक्षर करते समय किसी भी प्रकार के अवैध अधिकार का उपयोग नहीं किया।
स्याल के वकील डी.एस. दयाल की दलीलों से सहमत होते हुए अदालत ने न केवल शिकायतकर्ता के आरोपों को गलत करार दिया, बल्कि गुरचरण सिंह स्याल को बरी करने का आदेश भी जारी किया।