चंडीगढ़:- आज, चंडीगढ़ के सेक्टर 45डी में स्थित गौरी शंकर सेवादल गौशाला में भगवान श्रीकृष्ण के साक्षात् गोविंद स्वरूप में गोवर्धन पर्वत की पूजा और अन्नकूट का उत्सव बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर वेद मंत्रों के साथ गोवर्धन जी की पूजा और आरती की गई। गौरी शंकर सेवादल गौशाला के सदस्यों, श्री रमेश कुमार शर्मा, सुमित शर्मा, विनोद कुमार, रजनीश रामपाल, दिलीप रावत, लाखीराम और मनोहर लाल सैनी ने बताया कि आज का दिन अत्यंत आनंद और उत्सव का दिन है। आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने बृजवासियों को मूसलाधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन और सात रात तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाए रखा था।
गौशाला के प्रबंधक विनोद कुमार ने बताया कि कई वर्षों से गोवर्धन पर्वत की पूजा और विशाल अन्नकूट भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। यह परंपरा देवराज इंद्र के अभिमान को तोड़ने के लिए भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रचित एक दिव्य लीला की स्मृति में मनाई जाती है। भगवान श्रीकृष्ण, जो भगवान विष्णु के अवतार थे, ने गिरधारी रूप में यह लीला रची। उन्होंने देखा कि बृजवासी अपने-अपने घरों में उत्तम पकवान बना रहे थे। प्रभु ने पूछा, "ये पकवान आप किसके लिए बना रहे हैं?" माता यशोदा ने कहा, "लल्ला, ये पकवान हम देवराज इंद्र की पूजा के लिए बना रहे हैं।"
श्रीकृष्ण ने पूछा, "मैया, हम इंद्र की पूजा क्यों करते हैं?" माता यशोदा ने उत्तर दिया कि इंद्र वर्षा करते हैं, जिससे अन्न की उपज होती है और हमारी गायों को चारा मिलता है। तब भगवान श्रीकृष्ण बोले, "हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि हमारी गोमाता वहां चरती हैं और वहीं से उन्हें भोजन प्राप्त होता है। इस दृष्टि से गोवर्धन पर्वत ही पूजनीय है। इंद्र तो कभी दर्शन नहीं देते और पूजा न करने पर क्रोधित हो जाते हैं। इतना बड़ा अभिमान इंद्र को है। हमें इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए।"
इस बात को अपना अपमान समझकर देवराज इंद्र ने प्रलयकारी मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। बृजवासी भगवान श्रीकृष्ण को कोसने लगे कि उनके कहने पर यह संकट आया। तब मुरलीधर श्रीकृष्ण ने अपनी मुरली कमर पर रखी और अपनी सबसे छोटी कनिष्ठिका उंगली पर संपूर्ण गोवर्धन पर्वत को सात दिन और सात रात तक उठाए रखा। उन्होंने सभी बृजवासियों को उनकी गायों और बछड़ों समेत पर्वत की छत्रछाया में शरण लेने के लिए बुलाया। तभी से गोवर्धन पर्वत की पूजा की परंपरा चली आ रही है।
आज, सभी भक्तों और गोभक्तों ने गौशाला में एकत्र होकर गोवर्धन पर्वत की पूजा की और अन्नकूट भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने साक्षात् परब्रह्म परमेश्वर भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
चंडीगढ़ में गौरी शंकर सेवादल गौशाला में गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का भव्य उत्सव
