हिसार, 22 मार्च:- घरों में 16 दिन तक पूजा करने के बाद शनिवार को गणगौर को धूमधाम से विदा किया। शाम को बड़वाली ढाणी से महिलाएं डीजे पर हरियाणवी और राजस्थानी गीतों पर नाचते हुए गणगौर को विसर्जन करने के लिए निकली। यहां पूजा के बाद गणगौर को विसर्जन किया। रास्ते भर महिलाओं ने खूब नृत्य किया और गणगौर के साथ सेल्फी ली। इससे पहले दिन भर घरों में पूजा अर्चना चलती रही।
महिलाओं ने हाथों पर मेहंदी लगाई और गणगौर के गीत गाए। इस पर्व का महिलाएं पूरे साल भर इंतजार करती हैं और यह पर्व राजस्थान में काफी लोकप्रिय है, मगर अब हरियाणा में भी काफी प्रचलित हो रहा है। महिलाओं ने बताया कि गणगौर उत्सव में मुख्य रूप से माता पार्वती (गौरी) और भगवान शिव (ईसर) की आराधना की जाती है।
यह पर्व शिव-पार्वती के पवित्र प्रेम, अखंड सौभाग्य और सुखद दांपत्य जीवन का प्रतीक है। इस दौरान महिलाओं ने गारा की गणगौर कुआं पर क्यों रे खड़ी है, हिंगलू भर बालद लाया रे, म्हारा मान गुमानी ढोला, ओ जी म्हारे आंगन कुवलो खुदा दो, जे को ठंडो पानी, माथन भांवर घड़ा री गणगौर, घड़ा री गणगौर, ईशरदास जी बीरो चूनड़ी रंगाई, चमकण घाघरो चमकण चीर आदि गीत गाए।
महिलाओं ने बताया कि होली के दूसरे दिन से सोलह दिनों तक लड़कियां प्रतिदिन प्रात: काल ईसर-गणगौर को पूजती हैं। जिस लडक़ी की शादी हो जाती है वो शादी के प्रथम वर्ष अपने पीहर जाकर गणगौर की पूजा करती है। इसी कारण इसे सुहागपर्व भी कहा जाता है। कहा जाता है कि चैत्र शुक्ला तृतीया को राजा हिमाचल की पुत्री गौरी का विवाह शंकर भगवान के साथ हुआ था।
उसी की याद में यह त्योहार मनाया जाता है। इस मौके पर सीमा, विशाखा, उर्मिला, चित्रा, अर्चना, सुशीला, चंदा, विनीता, किरण, ललिता, सोनिया, सनू, संतोष, पुष्पा देवी, सविता पूजा, ज्योति, हेमा आदि मौजूद रही।
16 दिन घरों में पूजा करने के बाद गणगौर को धूमधाम से किया विदा
