फरीदकोट: आज कॉमरेड अमोलक भवन, फरीदकोट में नरेगा रोजगार प्राप्त मजदूर यूनियन (पंजीकृत) के जिला अध्यक्ष कॉमरेड वीर सिंह कमेआना की अध्यक्षता में विभिन्न गांवों के 'मेट्स' (पर्यवेक्षकों) की बैठक बुलाई गई। बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने "महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना" का नाम बदलकर "विकसित भारत जी राम जी स्कीम" कर दिया है, जो 1 जुलाई से लागू हो गई है। 
यदि हम 'गारंटी' का अर्थ समझें तो वह स्थायी होता है, लेकिन 'स्कीम' का मतलब है कि इसे कभी भी बदला जा सकता है या बंद किया जा सकता है। इस कारण ऐसा लग रहा है कि पंजाब के 18 लाख मजदूरों और कर्मचारियों का भविष्य अंधकार में है। इस योजना के तहत केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को 40 प्रतिशत हिस्सा डालने के लिए कहा है, जबकि पंजाब सरकार ने पहले ही मजदूरों और कर्मचारियों को कुछ नहीं दिया है।
इसके बाद नरेगा के सलाहकार कॉमरेड बलकार सिंह सहोता ने बताया कि कई गांवों में सरकारों ने नरेगा मजदूरों के गारंटी वाले काम बंद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि वे 125 दिन के रोजगार की बात कर रहे हैं, जबकि वे हमारे मजदूरों को 50 दिन का रोजगार भी नहीं दे रहे हैं। पंजाब में नरेगा कर्मचारियों को लगभग छह महीने से वेतन नहीं मिला है। वे लगातार धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं।
 हमारा शहर फरीदकोट, जो बाबा फरीद जी की पावन धरती है, गंदगी के ढेरों से भरा पड़ा है। 18-19 वर्षों से कर्मचारी और मजदूर लगातार पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, लेकिन सब कुछ देखते हुए भी सरकारें चुप्पी साधे बैठी हैं।
इस अवसर पर सुखमंदर सिंह (मेट ढूडी), गुरप्रीत कौर (मेट), कुलदीप कौर (मेट कोटसुखिया), अंजू कौर (मेट राजोवाला), करमजीत कौर (मेट गोलेवाला), कमलदीप कौर (मेट गोलेवाला), तरलोक सिंह (राजोवाला), लवप्रीत कौर (मेट पिपली) आदि उपस्थित थे।