नवांशहर: आज यहां संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर डिप्टी कमिश्नर एस.बी.एस. नगर के कार्यालय के बाहर पिछले दिनों चंडीगढ़ में गवर्नर हाउस की ओर मार्च कर रहे किसानों पर हुए अत्याचार के विरोध में विशाल रोष धरना दिया गया। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नाम मांग पत्र भेजा गया।
कीर्ति किसान यूनियन के राज्य समिति सदस्य भूपिंदर सिंह वड़ैच, राष्ट्रीय किसान यूनियन के नेता निर्मल सिंह औजला, बीकेयू राजेवाल के नेता संतोख सिंह और ऑल इंडिया किसान सभा के नेता जसविंदर सिंह भंगाल ने कहा कि केंद्र की सरकार पंजाब के साथ खुलेआम धक्का कर रही है। उन्होंने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) से स्थायी सदस्यता खत्म करने की सख्त शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि पंजाब के पानी पर पंजाब का हक है और पानी का समाधान रिपेरियन सिद्धांत के अनुसार होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि चंडीगढ़ और पंजाब यूनिवर्सिटी तुरंत पंजाब को सौंपा जाए।
उन्होंने मांग की कि बढ़े हुए डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस के रेट वापस लिए जाएं। सभी फसलों पर एमएसपी (MSP) देने का कानून बनाया जाए। बाढ़ और बारिश से फसलों के हुए नुकसान का तुरंत मुआवजा दिया जाए। सीड बिल 2025 और बिजली बिल 2025 वापस लिया जाए। पंजाब के लोगों को सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा हर हाल में पंजाब पर कब्जा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि पंजाब की भाषा, संस्कृति और अल्पसंख्यकों के लिए खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के एजेंडे में पंजाब के असली मुद्दे नहीं हैं, इसलिए यह लड़ाई पंजाब के लोगों को खुद लड़नी होगी। उन्होंने पंजाब सरकार पर भी केंद्र के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया और किसानों व अन्य वर्गों से एकजुट होकर संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया।
आज के धरने को तरसेम सिंह बैंस, सुरिंदर सिंह महिरमपुर, कुलवीर सिंह शाहपुर, दसोंधा सिंह, हरपाल सिंह कुक्कड़मज़ारा आदि ने भी संबोधित किया।
संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर डीसी कार्यालय के बाहर धरना देने के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा मांग पत्र
