करनाल, 14 अक्तूबर: कृषि उप-निदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि जिला में अब तक पराली जलाने के मामले में पांच किसानों पर एफ.आई.आर दर्ज करवाई जा चुकी है। साथ ही साथ पांचो किसानों से नियमानुसार जुर्माना वसूला गया है और मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर उनके रिकॉर्ड में रेड एंट्री कर दी गई है। जिससे ये किसान अगले दो सीजन अपनी फसल एम.एस.पी पर नहीं बेच पाएगें।
उन्होंने बताया कि चार किसान जिला के घरौंडा खंड व एक किसान खंड नीलोखेड़ी से सम्बंधित है। किसान जसमेर निवासी गाँव कैमला पर गांव मलिकपुर के रकबा के खेतों में धान की पराली में आग लगाने पर, किसान दिनेश कुमार व सुरजीत निवासी फुरलक,विक्की पुत्र राजकुमार निवासी गाँव बीजना व भजन सिंह पुत्र सुरता सिंह गांव ब्राह्मण माजरा पर धान की पराली में आग लगाने पर वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत धारा 39 व भारतीय न्याय संहिता (बी.एन.एस) 2023 के अंतर्गत धारा 223(ए) के तहत सम्बंधित थाना में एफ.आई.आर दर्ज करवाई गई है।
डॉ.वजीर सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष 2024 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार की अधिसूचना द्वारा आगजनी की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि बढाकर 2 एकड़ से कम भूमि, प्रति घटना तक 5,000 रुपए, 2 एकड़ या उससे अधिक किन्तु 5 एकड़ से कम भूमि, प्रति घटना तक 10,000 रुपए व 5 एकड़ से अधिक भूमि तक प्रति घटना 30,000 रुपए कर दी है। साथ ही आगजनी के दोषी किसान के खिलाफ एफ.आइ.आर की जाएगी व उसके मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल रिकॉर्ड में रेड एंट्री की जाएगी।
उन्होंने बताया कि प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए उपायुक्त उत्तम सिंह द्वारा जिला स्तरीय, खंड तहसील स्तरीय व गाँव स्तरीय कमेटी एनफोर्समेंट टीम का गठन किया गया है। इन टीमों में लगभग 750 अधिकारियों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के साथ-साथ नियमानुसार कार्यवाही भी अमल में ला रहे है। उपायुक्त के आदेशानुसार प्रत्येक खंड में फ्लैग मार्च निकाले जा रहे है। अभी तक खंड नीलोखेड़ी, इंद्री, असंध में 2 व अन्य खंडों में एक-एक फ्लैग मार्च निकाला गया।
उन्होंने बताया कि फ्लैग मार्च में संबंधित एस.डी.एम., बी.डी.पी.ओ., पुलिस, व कृषि विभाग के उच्च अधिकारी शामिल होते है, फ्लैग मार्च के दौरान किसानों से अपील की जाती है की वे फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाएं और पराली में आग लगाने की बजाय उसे अपनी आय का साधन बनाए यह हमारे लिए भी हितकारी है और पर्यावरण एवं मिट्टी के लिए भी लाभदायक है।
धान फसल कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट के रूप में उभरा है। जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है।
फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैस फैलती है, जिससे प्रदूषण ब?ता है, प्रदूषण से सांस लेने में तकलीफ,आँखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याए हो सकती है। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते है व सूक्ष्म जीवों और केंचुओ की संख्या कम हो जाति है जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।
धान फसल अवशेष जलाने पर जिला में पांच किसानों पर एफआईआर जुर्माना और रेड एंट्री
