हिसार, 24 मार्च: आध्यात्मिक गीता ज्ञान प्रचारिणी सभा के तत्वाधान में रामपुरा मौहल्ला स्थित गीता भवन में चैत्र नवरात्रों के उपलक्ष में चल रही राम कथा के पांचवें दिन की शुरुआत भजन गायक सुमित मित्तल, जितेश राखा व शुभम अरोड़ा के भजनों से हुई। इसके बाद कथा में प्रवचन देते हुए राय बरेली से आये आचार्य कविता कान्त वाजपेयी रामायणी ने अयोध्या नगरी की कथा करते हुए कहा कि राजा दशरथ के दरबार में जब दशरथ की खूब प्रशंसा हुई तो राजा दशरथ स्वयं इससे प्रसन्न नहीं हुए अपितु सिंहासन पर बैठकर दर्पण में स्वयं को देखा। यह दशरथ का आत्मावलोकन है। उन्होंने कहा कि अपने में देखने पर मनुष्य को कई कमियां दिखती हैं, जिसको हम समय रहते सुधार सकते हैं। शीशा देखने वाले दशरथ हैं और दूसरों को शीशा दिखाने वाला दशानन हुआ। हमें दूसरों के दोष दिखते हैं परंतु अपने नहीं दिखते। हमें अपने अंदर झांककर चिंतन और मनन करना चाहिये कि हम कहां खड़े हैं। सात्विक वृत्ति का उदय ही राम कथा की सार्थकता है।
इस अवसर पर संस्था की प्रधान उषा बख्शी, सचिव कृष्ण शर्मा, उपप्रधान कृष्ण महता, कोषाध्यक्ष धर्मबीर ग्रोवर, प्रेमलता बख्शी, सुशीला देवी, वीना चौधरी, भूषण चौधरी, रामशरण भुटानी, दीपक पाल, दयानंद बंसल, नंदलाल धमीजा, सुभाष गुप्ता, अर्जुन मानक, देशबंधु सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। संस्था की प्रधान उषा बख्शी ने बताया कि 26 मार्च तक नित्य प्रति सायं 4 से 6:30 बजे तक प्रवचन होंगे। 27 मार्च को सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 :30 बजे तक रामायण पाठ का भोग व भजन संकीर्तन होगा। समापन पर प्रसाद वितरित किया जाएगा।
गीता भवन में राम कथा का पांचवां दिन रामचरितमानस आत्मावलोकन का ग्रंथ है आचार्य कविता कान्त वाजपेयी
