हांसी (दिनकर गावड़ी):- वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा हरियाणा राज्य में फसल अवशेष प्रबंधन की समीक्षा को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी धान कटाई के व्यस्त सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने, खेतों में फसल अवशेष प्रबंधन की गतिविधियों की निगरानी करने तथा किसानों को पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि आगामी पीक हार्वेस्टिंग सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सभी संबंधित विभाग पूरी सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें।

बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के चेयरमैन, हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव, प्रदेश के सभी उपायुक्तों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण विभाग तथा फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े अन्य संबंधित अधिकारियों एवं हितधारकों ने भाग लिया। हांसी जिले की ओर से एडीसी लक्षित सरीन, उपमंडल कृषि अधिकारी रविंद्र कुमार, सहायक कृषि अभियंता गोपीराम सांगवान तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैज्ञानिक सुश्री कीर्ति ने बैठक में भाग लिया।

बैठक में बताया गया कि जिले में अभी तक लगभग 16 प्रतिशत फसल की कटाई हुई है। एक नवंबर से 30 नवंबर तक पीक हार्वेस्टिंग सीजन रहने की संभावना को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। इस अवधि के दौरान पराली जलाने की संभावित घटनाओं को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों, अधिकारियों और फील्ड टीमों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।

आगामी फसल कटाई सीजन को ध्यान में रखते हुए फील्ड टीमों को दिन के साथ-साथ रात के समय भी मुस्तैदी से निगरानी करने की हिदायत दी गई है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण करें और पराली जलाने की किसी भी संभावित घटना को रोकने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाएं।

जिले में निगरानी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से दो ड्रोन आवंटित किए गए हैं। उपायुक्त लक्षित सरीन द्वारा इन ड्रोन को किराये पर लेने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन्हें शीघ्र ही जिले में तैनात किया जाएगा। ड्रोन के माध्यम से गांवों और खेतों में निगरानी करने में मदद मिलेगी, जिससे विशेष रूप से रात के समय भी फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा सकेगी। इससे संबंधित टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और समय पर कार्रवाई करने में भी सहायता मिलेगी।

बैठक में अधिकारियों एवं फील्ड टीमों को निर्देश दिए गए कि वे किसानों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क स्थापित करें और उन्हें फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित करें। किसानों को पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान, वायु प्रदूषण तथा मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही, उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि यंत्रों एवं वैकल्पिक उपायों का उपयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि वे गांव स्तर पर किसानों, ग्राम पंचायतों, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा अन्य संबंधित टीमों के साथ समन्वय बनाकर जागरूकता गतिविधियों को गति दें। फील्ड स्तर पर निगरानी के साथ-साथ किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि पराली जलाने की नौबत न आए।

समीक्षा बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी संबंधित विभागों, अधिकारियों, फील्ड टीमों और किसानों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। आगामी पीक सीजन के दौरान निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने, किसानों को जागरूक करने तथा पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को पूरी गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए गए।

जिले में फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े प्रयासों को और मजबूत करने के लिए निगरानी, जागरूकता और विभागीय समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जा सके।