अंबाला, 9 अक्तूबर (आर. सिंह):- सिविल अस्पताल, अंबाला कैंट के नेत्र विभाग की टीम डॉ. जुगिंदर सिंह के नेतृत्व में सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, खुड्डा कलां पहुंची और 85 बच्चों की आंखों की जांच की। इनमें से 14 बच्चों की आंखों में किसी न किसी प्रकार की समस्या पाई गई, जिसके कारण उन्हें पढ़ने में परेशानी हो रही थी। इन बच्चों को आई ड्रॉप दिए गए और उन्हें चश्मे भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

इस अवसर पर मौजूद डॉ. जुगिंदर सिंह ने बताया कि भारत में कॉर्निया संबंधी अंधेपन की समस्या को दूर करने और लंबित मामलों को निपटाने के लिए हर साल लगभग दो लाख आंखों के दान की आवश्यकता है। करीब 12 से 12.5 लाख लोग कॉर्निया संबंधी अंधेपन से पीड़ित हैं।

कॉर्निया संबंधी अंधेपन के लगभग 25,000 से 30,000 नए मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में हर साल लगभग 25,000 से 30,000 आंखें दान के रूप में एकत्र की जाती हैं, हालांकि इनमें से केवल 60% से 70% आंखें ही प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए उपयोग योग्य होती हैं। राष्ट्रीय अंधता सर्वेक्षण के अनुमानों के अनुसार, देश में लगभग 50 लाख लोग अंधे हैं और 3.4 करोड़ लोग दृष्टि संबंधी कमजोरी से पीड़ित हैं। मोतियाबिंद के कारण होने वाले अंधेपन को समाप्त करने के लिए हर साल लगभग 67 लाख से 90 लाख मोतियाबिंद सर्जरी की आवश्यकता होती है।

डॉ. जुगिंदर सिंह ने कहा कि भारत में हर साल दो लाख आंखों की आवश्यकता है, जबकि दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या भी सालाना लगभग दो लाख है। उन्होंने कहा कि दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के नेत्रदान या लावारिस मृतकों के कानूनी वारिसों के माध्यम से इस कमी को पूरा किया जा सकता है। इसके लिए सरकार को नियम बनाने चाहिए।