होशियारपुर:- ओलंपियन  जर्नैल सिंह पनाम के पद चिन्हों पर चलते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फुटबॉल में छाप छोड़ने वाले अर्जुन अर्वाडी (Arjuna Award) फुटबॉलर  गुरदेव सिंह गिल देश और राज्य के खेल क्षेत्र में आए उलटफेर से बेहद चिंतित हैं और नई पीढ़ी को खेलों से जोड़ने के लिए लगातार सक्रिय और प्रयासशील रहते हैं। अपने दौर के खिलाड़ियों—सरदार इंदर सिंह जी, स्वर्गीय गुरकृपाल सिंह पाली, केसो कृपाल सिंह जी बड्डों, कालेवाल फत्तू के पुरेवाल भाइयों—द्वारा किए गए परिश्रम और उनकी उपलब्धियों का अक्सर जिक्र करने वाले गुरदेव गिल नई पीढ़ी में खेल की भावना, चाह, अनुशासन और लगन की कमी को खेलों में आए इस नकारात्मक परिवर्तन के लिए जिम्मेदार मानते हैं। 
उन्होंने कहा कि जब हमारी और हमारी पहले की पीढ़ी को किसी भी प्रकार की सुख-सुविधा या खेल उपकरण की उपलब्धता नहीं थी, तब भी देश से नामी खिलाड़ी पैदा हुए और दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया। अब हर गांव-हर शहर में अच्छे खेल मैदान, कोच साहिबान और अन्य सारी सुविधाएं मिलने के बावजूद पहले जैसे गुरुचर्या और नामवर खिलाड़ी उत्पन्न नहीं हो रहे, जिसके लिए गंभीरतापूर्वक सोचना-समझना आवश्यक है। सरकारों को भी सिर्फ दिखावटी प्रचार छोड़कर यथार्थपरक खेल नीति बनानी चाहिए, उभरते खिलाड़ियों को आवश्यक मदद प्रदान करके उन्हें उत्साहित करने तथा सँभालने की ज़रूरत है।
 उन्होंने महिलपुर के फुटबॉल खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों द्वारा नव स्थापित की गई "फुटबॉल प्लेयर्स वेलफेयर सोसाइटी, महिलपुर" की सराहना की और कहा कि यह नई पीढ़ी के खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने तथा पुराने खिलाड़ियों के बीच आपसी साझ को मजबूत बनाए रखने के लिए एक प्रशंसनीय कदम है। खुद संरक्षक होने के नाते उन्होंने हर तरह का सहयोग देने का भरोसा भी दिया। 
उन्होंने युवा पीढ़ी को नशे के कुहासे से बचने, बुरी संगत से दूर रहने, आपसी लड़ाई-झगड़ों से बचकर प्रकृति द्वारा दिए अनमोल वरदान—जीवन—को बेहतर ढंग से जीने और समय की कदर करने का संदेश दिया।
इस मौके पर उनके साथ डीएसपी सुरिंदरपाल सिंह, इंस्पेक्टर गुरदयाल सिंह बैन्स, टहल सिंह चहल (कनाडियन), तलविंदर सिंह हीर नंगल, खिलाड़ीया तथा खेल प्रेमी उपस्थित थे।