संगरूर, 9 अक्तूबर:- सामाजिक सुरक्षा एवं महिला तथा बाल विकास विभाग, पंजाब द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री प्रदीप सिंह गिल के दिशा-निर्देशों के तहत जिला संगरूर के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य बच्चों को दशहरे और दिवाली के त्योहारों के महत्व, सांस्कृतिक विरासत तथा अच्छाई और बुराई के बीच अंतर से सरल एवं रोचक तरीके से परिचित कराना था।
इस अवसर पर 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों और उनके अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने बच्चों को त्योहारों से जुड़ी कहानियां सुनाईं और परंपराओं तथा सांस्कृतिक मूल्यों के बारे में जानकारी दी। बच्चों को समझाया गया कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जबकि दिवाली रोशनी, खुशियों, आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देती है।
गतिविधियों के दौरान बच्चों को सच बोलने, दूसरों की मदद करने, बड़ों का सम्मान करने, आपसी सहयोग करने और अच्छी आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने खेलों, कहानियों, बातचीत और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने के अवसर प्रदान किए, ताकि वे त्योहारों के वास्तविक अर्थ को आसानी से समझ सकें।
ईसीसीई दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों के शुरुआती वर्षों में उनमें नैतिक मूल्यों, अच्छे संस्कारों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। इसके साथ ही, ऐसी गतिविधियां बच्चों के मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस अवसर पर अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी ने गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया। आंगनवाड़ी केंद्रों में खेल-खेल में शिक्षा देने के साथ-साथ खुशी, उत्साह और सांस्कृतिक मेल-जोल का माहौल देखने को मिला।
