सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि ऐसे मामलों में जहां (बयान की) सत्यता के संबंध में संदेह उठाया जाता है, हत्या के शिकार व्यक्ति का मृत्यु पूर्व दिया गया बयान आरोपी को दोषी ठहराने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।