करनाल, 6 मार्च:- करनाल जिले के घरौंडा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एसएचओ और डॉक्टर के बीच हुए विवाद ने अब बड़ा तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में डॉक्टरों ने सख्त रुख अपनाते हुए पोस्टमार्टम सेवाएं बंद कर दी हैं, जिससे मृतकों के परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर इलाके के कई सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने सड़कों पर उतरकर एसएचओ के समर्थन में निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित होती नजर आ रही हैं। 
बीती रात करीब 10 बजे करनाल के पुलिस अधीक्षक खुद सीएमओ कार्यालय पहुंचे और डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक में डॉक्टरों ने स्पष्ट कर दिया कि केवल सस्पेंशन से मामला शांत नहीं होगा। उनका कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों की भूमिका इस विवाद में सामने आई है, उनके खिलाफ मामला दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी की जाए । 
स्टेट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव ने बताया कि इस मामले को लेकर सुबह ही सीएमओ कार्यालय की ओर से पुलिस अधीक्षक को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेज दी गई थी। इसके बावजूद देर रात तक न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन अपने कर्मचारियों को बचाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि विवाद के बाद एसएचओ दीपक कुमार को सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया गया है, लेकिन डॉक्टर इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि मामले में गंभीर धाराएं बनती हैं और केवल सस्पेंशन से न्याय नहीं होगा। डॉक्टरों ने मांग की है कि एसएचओ दीपक कुमार समेत अन्य संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
डॉक्टरों और पुलिस के बीच बढ़े इस विवाद का असर अब आम लोगों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विरोध के चलते ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो गई हैं और पोस्टमार्टम हाउस में भी शवों का पोस्टमार्टम बंद कर दिया गया है। इससे अस्पतालों में आए मरीजों और मृतकों के परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल में एक मां अपने बेटे के शव के पोस्टमार्टम का इंतजार करते हुए रोती-बिलखती नजर आई। महिला ने बताया कि उसके 20 वर्षीय बेटे सुमित ने घर पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए करनाल ले आई, लेकिन पिछले एक दिन से पोस्टमार्टम नहीं हो पाया है। परिजनों का कहना है कि कम से कम आपातकालीन सेवाएं तो जारी रखी जानी चाहिए ताकि लोगों को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।
बताया जा रहा है कि इस विवाद के कारण करनाल के नागरिक अस्पताल में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। जिले के इतिहास में यह पहला मौका माना जा रहा है जब अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं तक पर असर पड़ा है। इस घटना को लेकर न केवल करनाल बल्कि पूरे हरियाणा के डॉक्टरों में नाराजगी देखी जा रही है।
डॉक्टर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि जब तक एसएचओ दीपक कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
वहीं दूसरी ओर घरौंडा क्षेत्र के कई ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने एसएचओ के समर्थन में आवाज उठाई है। उनका कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के एसएचओ को सस्पेंड करना उचित नहीं है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि एसएचओ और डॉक्टर के बीच जो भी विवाद हुआ है, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।