अंबाला, 7 अक्तूबर (आर. सिंह):- अंबाला के धूलकोट गांव में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत के गिरने से 7 मजदूरों की मौत के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अंबाला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हितेश गर्ग ने नामजद आरोपियों हरदीप सिंह जगी, सरबजोत सिंह और सिमरजोत सिंह की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर अपराधों और हादसों में अग्रिम जमानत को अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता, जिनमें मानव जीवन की क्षति हुई हो। इस फैसले के साथ आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों का इमारत के निर्माण या स्वामित्व से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने पुलिस द्वारा पेश की गई कॉल डिटेल और ईंटों की खरीद को अपर्याप्त बताया। सरकारी वकील ने इसका विरोध किया और एसआईटी रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि जांच के दौरान काफी साक्ष्य, गवाहों के बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिले हैं, जो निर्माण में आरोपियों की संलिप्तता को सीधे तौर पर उजागर करते हैं।
अपने आदेश में अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारियां जांच प्रक्रिया का एक आवश्यक हिस्सा हैं। अदालत ने एसआईटी को इस गैर-कानूनी निर्माण की अनदेखी करने वाले संबंधित अधिकारियों और नियामक एजेंसियों की भूमिका की भी जांच करने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार, 27 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 3 बजे धूलकोट गांव में निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इस भयानक हादसे में साइट पर काम कर रहे सात मजदूरों की दुखद मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
विशेष जांच टीम (एसआईटी) की अब तक की जांच से पता चला है कि पूरी इमारत बिना स्वीकृत योजनाओं या अनुमति के एक अनधिकृत क्षेत्र में बनाई जा रही थी। अंबाला शहर नगर निगम की रिपोर्ट ने भी पुष्टि की है कि निर्माण स्थल पूरी तरह गैर-कानूनी क्षेत्र के अंदर था। जांच एजेंसियां गैर-कानूनी निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के संबंध में आगे की कार्रवाई कर रही हैं। मृतक मजदूरों के परिवारों को मुआवजा और सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया भी जारी है।
मानवाधिकार आयोग का हस्तक्षेप
मानवाधिकार आयोग ने भी धूलकोट में निर्माणाधीन इमारत के गिरने और 7 मजदूरों की मौत तथा 12 के घायल होने का संज्ञान लिया है। आयोग ने उपायुक्त, एसपी और नगर निगम आयुक्त से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
शिकायतकर्ता अमरदीप सिंह भाटिया द्वारा आयोग के समक्ष उठाई गई गंभीर चिंताओं के बाद यह सामने आया है कि इमारत का निर्माण भवन नियमों का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा था। यह हादसा सुरक्षा मानकों के पालन में घोर लापरवाही का परिणाम माना जा रहा है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है।
आयोग ने जिला प्रशासन से हादसे में मारे गए और घायल हुए लोगों की सही संख्या, मृतकों के परिवारों को दी गई राहत एवं मुआवजा तथा प्रशासनिक या मजिस्ट्रेट जांच के निष्कर्षों के बारे में रिपोर्ट मांगी है। नगर निगम आयुक्त को स्वीकृत नक्शे, एनओसी, निर्माण परमिट और पिछले निरीक्षणों या नोटिसों से संबंधित पूरे रिकॉर्ड की प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
पुलिस अधीक्षक को दर्ज की गई एफआईआर, लगाई गई धाराओं, पुलिस जांच की प्रगति और दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है। मानवाधिकार आयोग ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी और संरचनात्मक विशेषज्ञ मूल्यांकन पर आधारित रिपोर्ट भी मांगी है।
आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने कहा कि धूलकोट हादसा एक गंभीर मानवीय मुद्दा है। इसके अलावा यह निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन और सक्षम अधिकारियों द्वारा निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाता है।
