चंडीगढ़ 06 नवंबर, 2024- सामुदायिक शिक्षा एवं विकलांगता अध्ययन विभाग ने आज “विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए उपकरणों के व्यावहारिक प्रशिक्षण” विषय पर कार्यशाला आयोजित की।
आशा एवं सीएआईडीडी की क्लीनिकल निदेशक, संसाधन व्यक्ति डॉ. छाया संभार्य प्रसाद ने व्याख्यान देते हुए वैश्विक विकासात्मक विलंब (जीडीडी) की अवधारणा, विशिष्ट अधिगम अक्षमता के लिए नैदानिक परीक्षण और इसकी पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने विशिष्ट अधिगम अक्षमता के संबंध में निमहंस उपकरण पर भी चर्चा की। उन्होंने ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार, अधिगम अक्षमता और बौद्धिक अक्षमता की प्रारंभिक पहचान के लिए कई महत्वपूर्ण उपकरण सुझाए।
डॉ. छाया ने कई उपकरणों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया; डायग्नोस्टिक टेस्ट फॉर लर्निंग डिसेबिलिटी (डी.टी.एल.डी.), डायग्नोस्टिक टेस्ट फॉर रीडिंग डिसेबिलिटी (डी.टी.आर.डी.), एन.आई.एम.एच.ए.एन.एस. बैटरी, ग्रेड लेवल असेसमेंट डिवाइस (जी.एल.ए.डी.) तथा अन्य बुद्धि परीक्षणों पर विस्तृत जानकारी दी तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए इसके लाभों के बारे में बताया। अंत में संकाय सदस्य श्री नितिन राज ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
इससे पहले विभाग के अध्यक्ष डॉ. एम.डी. सैफुर रहमान ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए उपकरण के महत्व पर स्वागत भाषण दिया। डॉ. एम.डी. सैफुर रहमान ने कहा कि बी.एड. विशेष शिक्षा (लर्निंग डिसेबिलिटी) के छात्रों को स्कूल जाने वाले बच्चों में लर्निंग डिसेबिलिटी की जांच करने तथा उसका आकलन करने के लिए उपकरणों के बारे में जानने की आवश्यकता है तथा इससे उनके लिए शैक्षिक योजना विकसित करने में मदद मिलेगी।