नवांशहर/राहों: राष्ट्रीय मजदूर संगठन (एनएलओ) के संयोजक बलदेव भारती ने कहा; कि मनरेगा श्रमिक कानूनी तौर पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अनुदान अधिनियम-2005 के अनुसार 'न्यूनतम वेतन अधिनियम-1948' के तहत निर्धारित दैनिक मजदूरी के हकदार हैं। पंजाब सरकार के श्रम विभाग द्वारा दिनांक 01/09/2024 से कृषि श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 441/- 12 पैसे निर्धारित की गई है। लेकिन पंजाब में मनरेगा मजदूरों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 322 रुपये प्रतिदिन मिल रहे हैं और प्रत्येक मजदूर को प्रतिदिन 119 रुपये 12 पैसे का नुकसान हो रहा है।
पंजाब सरकार न्यूनतम वेतन अधिनियम-1948 के अनुसार दैनिक वेतन का भुगतान करने में अपना उचित योगदान नहीं दे रही है। उन्होंने मांग की कि मनरेगा में 'न्यूनतम वेतन अधिनियम-1948' लागू कर श्रमिकों की दैनिक मजदूरी श्रम विभाग द्वारा निर्धारित दैनिक मजदूरी के बराबर की जाये. एनएलओ के प्रमुख बलदेव भारती ने आगे कहा कि पंजाब सरकार ने 01 सितंबर 2024 से कुशल श्रमिकों के लिए दैनिक वेतन 487/- रुपये 42 पैसे तय किया है.
लेकिन मनरेगा के कार्य को सुचारु रूप से चलाने वाले मेट, जो कुशल श्रेणी में आते हैं, उन्हें इसके बराबर नहीं, बल्कि मात्र 322/- प्रतिदिन मनरेगा मजदूरों का वेतन दिया जा रहा है. इस प्रकार मेट्स को प्रति दिन 165/- रुपये 42 पैसे का नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मनरेगा साथियों को कुशल मजदूरी मिले। उन्होंने यह भी मांग की कि वित्तीय वर्ष के दौरान मनरेगा श्रमिकों के परिवारों की आजीविका के लिए रोजगार 100 दिन से बढ़ाकर कम से कम 200 दिन किया जाना चाहिए।