चण्डीगढ़: गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स, सेक्टर-42 में आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान और ड्यूटी व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। वेतन में देरी, प्रशासनिक स्वीकृतियों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति और 15-15 दिन के रोस्टर के आधार पर ड्यूटी लगाए जाने के मुद्दे कर्मचारियों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से स्थिति स्पष्ट न होने के कारण वे आर्थिक और मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार कॉलेज में कार्यरत कई आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन अभी तक जारी नहीं किया गया है। कर्मचारियों का दावा है कि कुछ कर्मचारियों की प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद उनका वेतन लंबित है। वहीं दूसरी ओर कुछ कर्मचारियों की स्वीकृति अभी तक लंबित बताई जा रही है, जबकि उनसे नियमित रूप से कार्य लिया जा रहा है। इस स्थिति ने कर्मचारियों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
वेतन न मिलने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। कर्मचारियों का कहना है कि परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की स्कूल फीस, मकान का किराया, बिजली-पानी के बिल, दवाइयों और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में दिक्कतें आ रही हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए उधार का सहारा लेना पड़ रहा है।
मामले का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू 15-15 दिन के रोस्टर के आधार पर ड्यूटी लगाने की व्यवस्था को लेकर सामने आया है। कर्मचारियों का कहना है कि इस व्यवस्था को लागू किए जाने संबंधी कोई स्पष्ट लिखित आदेश उनके सामने नहीं रखा गया है। ऐसे में कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि ड्यूटी व्यवस्था में बदलाव किया गया है तो उसका आधार क्या है और संबंधित आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि प्रशासनिक स्वीकृति लंबित होना वेतन भुगतान में देरी का कारण है तो जिन कर्मचारियों की स्वीकृति पहले ही प्राप्त हो चुकी है, उनका वेतन तत्काल जारी किया जाना चाहिए। वहीं जिन कर्मचारियों की स्वीकृति अभी लंबित है, उनसे नियमित रूप से कार्य लिए जाने की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। कर्मचारियों का मानना है कि पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
सूत्रों के मुताबिक प्रशासनिक स्तर पर आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन प्रत्येक माह की 7 तारीख तक जारी करने के निर्देश हैं। इसके बावजूद जून माह में भी कई कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि समय पर वेतन भुगतान न होने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है और कार्यस्थल पर भी अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।
मामले को लेकर कर्मचारियों तथा कुछ सामाजिक संगठनों ने अब उच्च स्तर पर हस्तक्षेप की मांग शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत जानकारी पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, निदेशक उच्च शिक्षा, शिक्षा सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को ई-मेल और सोशल मीडिया के माध्यम से भेजी गई है। कर्मचारियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, लंबित वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा ड्यूटी रोस्टर और प्रशासनिक स्वीकृतियों से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ सकती हैं। उनका मानना है कि संबंधित विभागों और कॉलेज प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करते हुए कर्मचारियों के हित में आवश्यक कदम उठाने चाहिए ताकि लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता समाप्त हो सके।
अब निगाहें उच्च शिक्षा विभाग, चंडीगढ़ प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर टिकी हैं। कर्मचारियों को उम्मीद है कि उनके वेतन, प्रशासनिक स्वीकृतियों और ड्यूटी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जल्द निर्णय लिया जाएगा तथा लंबित मामलों का समाधान कर उन्हें राहत प्रदान की जाएगी।
राज्यपाल प्रशासक से हस्तक्षेप की मांग सेक्टर42 गर्ल्स कॉलेज में वेतन भुगतान और ड्यूटी व्यवस्था के मुद्दे पर कर्मचारियों की बढ़ी नाराजगी
