करनाल, 04 सितम्बर- करनाल के मॉडल टाउन में साइबर ठगों ने सीनियर सिटीजन कार्ड बनवाने और इसके जरिए मेडिकल समेत अन्य सुविधाएं दिलाने का झांसा देकर एक दंपती को ठगी का शिकार बना लिया। आरोपियों ने पहले फोन कर महिला के नाम कार्ड बनवाने का भरोसा दिलाया और फिर बैंक खाते की जानकारी व जरूरी दस्तावेज हासिल कर लिए। इसके बाद वॉट्सऐप पर भेजे गए एक फॉर्म को भरवाकर ओके करवाया गया। प्रक्रिया पूरी होते ही दो अलग-अलग बैंक खातों से कई लेनदेन के जरिए 1 लाख 25 हजार 900 रुपये निकाल लिए गए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित ने 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। मामले में करनाल साइबर क्राइम थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अज्ञात नंबर से आया था फोन:
पुलिस को दी शिकायत में राकेश शेली ने बताया कि उनकी पत्नी नीना शेली के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने बताया कि नीना शेली का सीनियर सिटीजन कार्ड बनाया जाएगा। इसके जरिए उन्हें मेडिकल सहित कई अन्य सुविधाएं मिलने का दावा किया गया।
कॉलर की बातों पर विश्वास करते हुए राकेश शेली ने आरोपियों के साथ अपने बैंक खाते की जानकारी और जरूरी दस्तावेज साझा कर दिए। इसके बाद आरोपियों ने नीना शेली के वॉट्सऐप नंबर पर एक फॉर्म भेजा। फॉर्म भरने के बाद उसे ओके करने के लिए कहा गया। शिकायत के अनुसार, फॉर्म की प्रक्रिया पूरी होने के कुछ समय बाद ही बैंक खातों से रकम निकलनी शुरू हो गई।
दो बैंक खातों से निकाली गई रकम:
राकेश शेली के पंजाब नेशनल बैंक खाते से चार अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए रकम निकाली गई। इनमें 4,900 रुपये, 5,000 रुपये और 10-10 हजार रुपये के दो लेनदेन शामिल हैं।
इसके अलावा पंजाब एंड सिंध बैंक, मॉडल टाउन करनाल के खाते से भी दो बार 48-48 हजार रुपये निकाले गए। इस तरह आरोपियों ने कुल 1,25,900 रुपये की ठगी कर ली। ठगी का पता चलने पर शिकायतकर्ता ने तुरंत साइबर अपराध की हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, ताकि रकम को फ्रीज कराने और आरोपियों तक पहुंचने की कार्रवाई की जा सके।
जीरो एफआईआर के आधार पर करनाल में दर्ज हुआ केस:
मामला नोडल साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, पंचकूला, हरियाणा से जीरो एफआईआर के रूप में करनाल साइबर क्राइम थाना पहुंचा। शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का मामला पाया। पुलिस ने बीती रात शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर लिया। मामले की जांच एसआई देवेंद्र को सौंपी गई है। पुलिस अब आरोपियों की पहचान करने के साथ-साथ ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और पूरे लेनदेन में किन लोगों की भूमिका रही, इसकी जांच कर रही है।
