करनाल, 7 नवंबर: जिले में विकास कार्यों की फाइलों में हो रही देरी से नाराज भाजपा के जिला पार्षदों ने शुक्रवार को जिला परिषद कार्यालय में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नाराज पार्षदों ने चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) के दफ्तर पर ताला लगाकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका आरोप है कि सीईओ महीनों से दफ्तर में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते, जिससे जनता के कार्य ठप पड़े हैं।
पार्षदों का कहना है कि जिले में करोड़ों रुपये के विकास कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, लेकिन पिछले तीन महीनों से फाइलें सीईओ कार्यालय में अटकी हुई हैं और अब तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं किए गए। यदि यही हाल रहा तो सरकार द्वारा जारी फंड वापस लौट जाएंगे और जनता के विकास कार्य अधूरे रह जाएंगे।
**‘सीईओ दफ्तर में नहीं आते, समय नहीं देते’
जिला पार्षद गुरदीप राणा ने बताया कि सीईओ जिला परिषद चेयरमैन के सचिव होते हैं, लेकिन जब सचिव ही कार्यालय में मौजूद न रहें तो कार्य कैसे होगा। उन्होंने कहा कि कई बार समय लेकर मिलने की कोशिश की गई, परंतु अधिकारी न तो मिले और न ही काम करवाने के निर्देश दिए। ऐसा लगता है जैसे अधिकारी को न पार्षदों की परवाह है, न जनता की समस्याओं की।
**टॉप रैंक अधिकारी से ऐसी उम्मीद नहीं थी
पार्षदों ने कहा कि आईएएस सोनू भट्ट को ‘टॉप रैंक अधिकारी’ कहकर करनाल भेजा गया था, मगर उनके काम में गंभीरता नजर नहीं आ रही। निर्वाचित प्रतिनिधियों से मुलाकात के लिए समय न निकालना, प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अधिकारी अगर प्रतिनिधियों से ही संवाद नहीं करेंगे तो आम नागरिकों की सुनवाई कैसे होगी?
**विकास योजनाएं अटकीं, जनता को नहीं मिल रहा लाभ
पार्षदों के अनुसार, लगभग आठ महीने पहले जिन कार्यों को मंजूरी मिल चुकी थी, वे अब भी शुरू नहीं हो पाए हैं। वर्क ऑर्डर जारी न होने से गांवों और वार्डों में विकास योजनाएं अधर में लटकी हैं। इससे जनता को किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा और पंचायतों में रोष बढ़ता जा रहा है।
**सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग
पार्षदों ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी को काम नहीं करना तो सरकार स्पष्ट रूप से उन्हें यह चार्ज न दे। पार्षदों ने मुख्यमंत्री और पंचायती राज विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि विकास कार्यों में और देरी न हो और जनता को राहत मिल सके।
