हुशियारपुर:- सड़के आर्थिक समृद्धि, दुर्घटनाओं में कमी और मानसिक तनाव से मुक्ति में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए सड़कों की मजबूती और वार्मैन (बरम) की उपस्थिति काम करने वाली भावना पर निर्भर करती है, न कि भ्रष्टाचार और चोर मठेरों पर। लेबर पार्टी के अध्यक्ष जै गोपाल धीमान व लहिंबर सिंह ने खरौदी से वाधा तक बनी 13.200 किलोमीटर लंबी और 15.500 मीटर चौड़ी तथा 1.1 मीटर बरम की चौड़ाई वाली सड़क के निर्माण में नियमों के अनुसार काम न किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ये बड़ी खामियां सड़क पर चलते ही दिखाई देती हैं। इस परियोजना की कुल लागत 842.90 लाख रुपये बतायी गयी और सड़कों की मरम्मत के लिए कुल 54.71 लाख रुपये पाँच सालों के लिए रखे गए थे।
रख-रखाव के खर्चे 2023–24 में 6.74 लाख रुपये, 2024–25 में 8.09 लाख रुपये, 2025–26 में 10.69 लाख रुपये, 2026–27 में 13.29 लाख रुपये और 2027–28 में 15.90 लाख रुपये निर्धारित किए गए थे। रख-रखाव में घास-फूस की कटाई, बारिश के कारण हुए कटान की मरम्मत, मिट्टी के बरमों की मरम्मत, खड्डों और तरेड़ों को भरना, सड़क किनारे नालियों की साल में दो बार मरम्मत (पर नालियाँ दिखाई ही नहीं देतीं), पुलियों की मरम्मत, सड़क के साज-सामान की मरम्मत और पुलियों की सफेदी का काम शामिल है।
धीमान ने बताया कि संबंधित विभाग के विशेषज्ञ इंजीनियरों ने चुपचाप सब कुछ अधूरी सड़क का मुआयना करके पास कर दिया, जबकि कई जगह सड़क के किनारे नालियों का नामो-निशान तक नहीं है और दोनों ओर एक-एक मीटर चौड़े बरम भी नजर नहीं आते।
हालत यह है कि कई स्थानों पर तो बरमों की चौड़ाई मुश्किल से 6 इंच से 1 फुट के बीच दिखती है, जबकि कागजों में यह चौड़ाई 3-3 फुट बतायी गयी है। उन्होंने कहा कि कई जगह सड़क की चौड़ाई 10-10 फुट दिखाई देती है, कहंई-कहीं 13-13 फुट और कहीं 14-14 फुट, जबकि वास्तविक रूप में बरमों के 6 फुट के अलावा सड़क की चौड़ाई 16.5 फुट होनी चाहिए।
हैरानी की बात यह है कि इस सड़क का कई उच्च अधिकारी भी निरीक्षण कर चुके हैं और सरकारों को भी गलत रिपोर्टें दी गयी होंगी, साथ ही सड़क का ऑडिट भी किया गया होगा। धीमान ने कहा कि एक समय था जब पीडब्ल्यूडी और बीएंडआर विभाग की कार्यशैली को सलाम किया जाता था और सड़क पर बेलदार घूमते थे तथा टूट-फूट पर तुरंत मरम्मत कराते थे।
सड़क दुर्घटनाओं का असली कारण सड़कों की बनावट में फैला गहरा भ्रष्टाचार है। यह सड़क प्रधानमंत्री सड़क ग्राम योजना के तहत बनी है फिर भी इतने कई खामियां कैसे मिलती हैं। केंद्र सरकार भ्रष्टाचार मुक्त प्रबंधन की बातें तो करती है, पर सरकार की नज़रों के सामने भ्रष्टाचार उड़ान भर रहा है।
धीमान ने बताया कि इसी सड़क के किनारे बरम वाली जगहों पर बिजली के खम्बे खतरनाक हालत में खड़े हैं, और हुकूमतपुर के पास सड़क किनारे 2-2 फुट ऊपर पेयजल के हौदे, कचरे के ढेर, पशुओं का गोबर आदि भी दिखते हैं। जिसकी वजह से हर उस व्यक्ति के लिए यह हाई-रिस्क जोन बन चुका है जो इस सड़क पर चलता है, क्योंकि बिजली के खम्बे सड़क के किनारे इतने घातक हैं। अगर ऐसी खामियां हैं तो रोड सेफ्टी के नाम पर खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपये का क्या लाभ और अगर सड़कों पर रोड सेफ्टी ही नहीं है?
उन्होंने कहा कि सड़कों के बरम रोड सेफ्टी के नियमों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी सड़क पर ट्रैफिक चिह्न, चेतावनी बोर्ड, स्कूलों और zebra crossing जैसे संकेत भी नजर नहीं आते, जबकि इन चिह्नों का स्थिर आवागमन बनाए रखने में अहम रोल है। दुखद यह है कि ट्रैफिक चिह्नों के नाम पर भी भ्रष्टाचार होता है। क्या अब केंद्र सरकार इसकी जांच CBI को सौंपेगी ताकि करोड़ों रुपये के गबन का पर्दाफाश हो सके?
भ्रष्टाचार ने सड़कों की गुणवत्ता को तहसनहस कर दिया सड़कों पर आवाजाही की सुरक्षा सड़कों की बनावट पर निर्भर करती है धीमान
