हरियाणा/हिसार:- अखिल भारतीय सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. इंद्र गोयल द्वारा संपन्न 9 दिवसीय पूर्ण मौन साधना का आज हवन, प्रार्थना एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान के साथ विधिवत समापन हुआ। आत्मशुद्धि, मानसिक एकाग्रता एवं आंतरिक ऊर्जा जागरण के उद्देश्य से आयोजित इस साधना ने आध्यात्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
19 जनवरी से 27 जनवरी के दौरान डॉ. गोयल ने पूर्ण मौन का पालन करते हुए प्रतिदिन प्रातः ध्यान, योगाभ्यास, वेद एवं गीता अध्ययन, सभी वेदों का चिंतन, दुर्गा सप्तशती मंत्रोच्चार एवं गुप्त नवरात्रि का प्रतिदिन पाठ तथा हवन यज्ञ किया। इस दौरान उन्होंने बाहरी संवाद से दूरी बनाकर आत्मसंवाद एवं आत्ममंथन को प्राथमिकता दी। उनका मानना है कि मौन मनुष्य को स्वयं से जोड़ता है और आंतरिक शांति का साक्षात्कार कराता है।
साधना के दौरान उन्होंने ‘द्वैत से अद्वैत’ की आध्यात्मिक अनुभूति पर विशेष चिंतन किया। उनके अनुसार सामान्य जीवन में व्यक्ति ‘मैं’ और ‘तुम’ के भेद में जीता है, किंतु ध्यान और मौन के अभ्यास से यह भेद समाप्त होने लगता है। अद्वैत की अवस्था में संपूर्ण सृष्टि एक ही चेतना का स्वरूप प्रतीत होती है, जिससे सेवा, करुणा और निस्वार्थ कर्म का भाव स्वतः जागृत होता है। उनके शब्दों में, “द्वैत में कार्य बोझ लगता है, अद्वैत में वही कार्य सेवा बन जाता है।” समापन अवसर पर डॉ. गोयल ने कहा, “मौन हमें स्वयं से मिलाता है और कर्म हमें समाज से जोड़ता है।जब साधना और सेवा साथ चलती है, तभी जीवन सार्थक बनता है।”
डॉ. गोयल पिछले कई दशकों से भारतीय जीवन बीमा निगम से जुड़े हुए हैं तथा वित्तीय जागरूकता और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे “जीवन जीने की कला”, “जीवन बीमा क्यों”, “1919 कीज ऑफ लाइफ” एवं “मौन साधना: एक अद्वितीय अनुभव” सहित कई प्रेरणादायी पुस्तकों के लेखक भी हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर वे अखिल भारतीय सेवा संघ के माध्यम से सेवा, संस्कार, नैतिकता एवं राष्ट्रनिर्माण से जुड़े कार्यक्रमों का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका मानना है कि आध्यात्मिक साधना तभी पूर्ण मानी जाती है जब उसका लाभ समाज और मानवता तक पहुँचे।
साधना के उपरांत वे कर्मयोग, सेवा भावना और नैतिक कार्यशैली पर अपने अनुभव साझा करेंगे। कार्यक्रम का समापन हवन एवं प्रार्थना के पश्चात परिवारजनों के साथ चाय ग्रहण कर मौन व्रत की पूर्णाहुति के साथ किया गया।
डॉ इंदर गोयल की नौ दिवसीय पूर्ण मौन साधना का समापन साधना और सेवा का दिया संदेश।
