करनाल, 17 अक्टूबर:- हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने प्रदेश के सभी बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों की निजता, गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था को लेकर वैधानिक परामर्श जारी किया है। आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी उपायुक्तों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों से 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
निरीक्षण के दौरान आयोग ने पाया कि कुछ संस्थानों में सीसीटीवी सिस्टम निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप से जुड़े हुए हैं। इससे लाइव फुटेज देखने, रिकॉर्डिंग डाउनलोड करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का खतरा बना रहता है। आयोग ने इसे बच्चों की निजता और सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है। यह एडवाइजरी सीपीसीआर अधिनियम के तहत जारी की गई है। एडवाइजरी के अनुसार, सीसीटीवी सिस्टम, फुटेज और पासवर्ड का नियंत्रण संस्थान के प्रभारी के पास रहेगा। इसकी पहुंच केवल अधिकृत कर्मचारियों को दी जाएगी और साझा पासवर्ड का इस्तेमाल नहीं होगा। निजी मोबाइल या लैपटॉप से सीसीटीवी जोड़ना प्रतिबंधित रहेगा तथा रिमोट एक्सेस डिफॉल्ट रूप से बंद रखना होगा। सीसीटीवी मॉनिटर की फोटो खींचने, स्क्रीन रिकॉर्डिंग करने, फुटेज डाउनलोड या कॉपी करने तथा व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया या ईमेल के माध्यम से साझा करने पर रोक रहेगी। डीवीआर/एनवीआर को सुरक्षित स्थान पर रखने, पासवर्ड नियमित रूप से बदलने और एक्सेस लॉग की जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं। किसी घटना से संबंधित फुटेज कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखनी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि शौचालय, स्नानघर और कपड़े बदलने वाले स्थानों के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
हर संस्थान को अधिकृत उपयोगकर्ताओं का रिकॉर्ड और फुटेज निकालने का रजिस्टर रखना होगा। इसमें तारीख, उद्देश्य और फुटेज प्राप्त करने वाले व्यक्ति का विवरण दर्ज किया जाएगा। अनधिकृत पहुंच या सुरक्षा में चूक की सूचना तत्काल सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी। महिला एवं बाल विकास विभाग को सभी संबंधित जिला अधिकारियों और बाल देखभाल संस्थानों को एडवाइजरी लागू करने के लिए लिखित निर्देश जारी करने को कहा गया है। निरीक्षण के दौरान सीसीटीवी से जुड़े उपकरणों, लाइव और रिकॉर्डेड फुटेज तक पहुंच रखने वाले व्यक्तियों, पासवर्ड सुरक्षा, रिमोट एक्सेस और रिकॉर्डिंग के सुरक्षित भंडारण की जांच की जाएगी। बालिकाओं से संबंधित संस्थानों में विशेष सुरक्षा उपायों के पालन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने कहा कि केवल सीसीटीवी कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी फुटेज के उपयोग, भंडारण और साझा करने पर प्रभावी नियंत्रण भी जरूरी है। निगरानी का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा होना चाहिए, न कि उनकी निजता या गतिविधियों को अनधिकृत लोगों के सामने उजागर करना। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ उचित प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
