करनाल, 28 मई:- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बागवानी क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, पादप कीट नियंत्रण और रोग विज्ञान जैसे नए विषयों में मास्टर डिग्री और पीएचडी की शुरुआत की जाएगी। साथ ही राज्य सरकार द्वारा 14 हॉर्टिकल्चर साइंस सेंटर विश्वविद्यालय को समर्पित किए जाएंगे, जो किसानों तक आधुनिक तकनीक, गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री और वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री करनाल स्थित महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय और लेफ्टिनेंट अमित मेमोरियल फाउंडेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का विषय “अमृतकाल में बागवानी फसलों के लिए गुणवत्तायुक्त बीज एवं रोपण सामग्री का रणनीतिक प्रतिमान” था। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और शहीद लेफ्टिनेंट अमित को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत विश्व में फलों और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, ग्रेडिंग और पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन की कमी के कारण भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तायुक्त बीज और पौध से कृषि उत्पादकता में 15 से 25 प्रतिशत तथा रोगमुक्त पौध सामग्री से बागवानी उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु, घटते जल स्तर और छोटी भूमि जोतों के बीच पारंपरिक खेती से किसानों की आय बढ़ाना कठिन है। ऐसे में बागवानी आधारित खेती किसानों की समृद्धि का नया माध्यम बन रही है। हरियाणा में फल, सब्जियां, मशरूम, फूल और औषधीय पौधों की खेती तेजी से बढ़ रही है। किसान ड्रिप इरिगेशन, पॉलीहाउस, नेट हाउस और टिश्यू कल्चर जैसी तकनीकों से अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2030 तक बागवानी क्षेत्र को दोगुना और उत्पादन को तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है। प्रदेश में 13 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। भावांतर भरपाई योजना के तहत 21 बागवानी फसलों के संरक्षित मूल्य तय किए गए हैं और अब तक 40 हजार किसानों को 196 करोड़ रुपये का लाभ मिला है। मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर फलों के लिए मुआवजा 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा सब्जियों और मसालों के लिए 30 हजार से बढ़ाकर 40 हजार रुपये प्रति एकड़ किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार स्मार्ट बागवानी तकनीकों जैसे हाइड्रोपोनिक्स, एरोपोनिक्स, ग्रीन हाउस और वर्टिकल फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है। साथ ही, प्रदेश में ग्रामीण हाट मंडियां स्थापित की जाएंगी और कोल्ड चेन नीति लागू करने की योजना है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने अनुसंधान, प्रशिक्षण और किसानों के हित में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, प्रगतिशील किसानों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया।