चंडीगढ़, 5 नवंबर:- चंडीगढ़ प्रेस क्लब में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के पूर्व प्रोफेसर और सामाजिक विश्लेषक डॉ. हरविंदर सिंह भट्टी की काव्य पुस्तक ‘चौरासीनामा’ का लोकार्पण किया गया। श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार सिंह साहिब भाई रणजीत सिंह, पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव रमेश इंदर सिंह, पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल, पंजाबी अकादमी दिल्ली के पूर्व सचिव गुरभेज सिंह गुराया, वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह भुल्लर, दलजीत सिंह शाही और आरबाइड वर्ल्ड चैनल के संचालक दविंदर पाल ने पुस्तक पाठकों को अर्पित की।

समारोह की शुरुआत में प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक जगतार सिंह भुल्लर ने कहा कि पंजाब ने न तो 1947 मांगा था और न ही 1984, लेकिन सियासत की भूख के कारण 1947 और 1984 के दौरान पंजाब और दिल्ली की धरती लहूलुहान हुई। उन्होंने सवाल किया कि 1947 से 1984 तक पंजाब को लूटने, पीटने और मारने वाले कौन थे? उन्होंने कहा कि आज तक भी अंधेरा कायम है और लोगों को इंसाफ नहीं मिला।

इस अवसर पर पंजाबी लोक विरासत अकादमी लुधियाना के चेयरमैन प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने 10 नवंबर 1984 के आसपास के समय को याद करते हुए कहा कि जब दिल्ली और कानपुर से उजड़े हुए लोग ट्रेनों, बसों और अपने वाहनों के जरिए लुधियाना पहुंचे और उसे सुरक्षित स्थान समझा, तो उस समय उनके दुख-दर्द और उनके द्वारा झेली गई पीड़ा को सुनना और देखना बेहद कठिन था। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं यह दुखद पहलू भी देखा कि लुधियाना वासियों ने उजड़े हुए लोगों का दर्द बांटने के बजाय मकानों, प्लॉटों और दुकानों के दाम रातोंरात दोगुने-तिगुने कर दिए। स्कूल संचालकों ने उजड़े हुए परिवारों की मदद करने के बजाय उनके बच्चों को दाखिला देने से इनकार कर दिया।

उस कठिन समय में दर्दमंद ज्ञानी रघबीर सिंह और ज्ञानी हरजीत सिंह जी ने गुजरांवाला गुरु नानक खालसा कॉलेज लुधियाना के एक कोने में जीजीएन पब्लिक स्कूल शुरू किया। इस तरह उन सिख परिवारों को फिर से बसाने में भी मदद की गई।

श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार सिंह साहिब भाई रणजीत सिंह, रमेश इंदर सिंह, अमेरिका में बसे फिल्म अभिनेता और महाभारत धारावाहिक में धृतराष्ट्र की भूमिका निभाने वाले श्री गिरजा शंकर, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. गुरिंदर सिंह मान, हून मैगजीन के संपादक सुशील दोसांझ, पंजाबी लेखक दलजीत शाही एडवोकेट समराला और गुरभेज सिंह गुराया ने भी संबोधन किया।

काव्य पुस्तक ‘चौरासीनामा’ के लेखक प्रो. हरविंदर सिंह भट्टी ने कहा कि भीड़तंत्र में इंसान कब शैतान बन जाता है, इसका पता भी नहीं चलता। देश के विभाजन के समय 1947 में और दिल्ली में हुए कत्लेआम के दौरान भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने कहा कि दिल्ली में तो जिन लोगों ने सिखों का कत्लेआम किया, वही बाद में बचे हुए सिखों को हौसला देने पहुंच गए।

गुरभेज सिंह गुराया ने बताया कि डॉ. हरविंदर सिंह भट्टी का छोटा भाई भी इस कत्लेआम में मारा गया था। उन्होंने बताया कि डॉ. भट्टी ने विद्यार्थी नेता और अध्यापक नेता के रूप में कार्य करने के बाद पंजाबी यूनिवर्सिटी में समाज विज्ञान के प्रोफेसर के तौर पर लगभग 35 वर्षों तक अध्यापन, शोध और प्रशासन से संबंधित जिम्मेदारियां निभाईं।

इस अवसर पर यूनीस्टार प्रकाशन घर के मालिक हरीश जैन, पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव सुरेश कुमार, पंजाब के पूर्व डीजीपी स. सरबदीप सिंह विरक, प्रसिद्ध पत्रकार बलजीत बल्ली, सरबजीत धालीवाल, राजिंदर सिंह तग्गड़, अजायब सिंह औजला, सुरजीत विशाद समराला, अग्रणी किसान दमन शर्मा लुधियाना, पंजाबी लेखक सभा के प्रधान दीपक शर्मा चनारथल, पूर्व एआईजी हरप्रीत सिंह संधू, सुखदेव सिंह विरक, रतन सिंह बराड़, ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन के पूर्व वरिष्ठ नेता इंजीनियर सरबजीत सिंह सोहल, स्पोक्समैन अखबार की संपादक कमल दुसांझ, पंजाबी ट्रिब्यून के सहायक संपादक जसबीर समर, गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज चंडीगढ़ के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. कुलदीप सिंह, पंजाबी चिंतक और प्रसिद्ध उपन्यासकार प्रो. संतोष सिंह औजला, डॉ. गुरप्रीत सिंह लहिल, दूरदर्शन के सेवानिवृत्त समाचार संपादक हरबंस सोढी, जोरा सिंह, दविंदर दवी सहित अनेक शख्सियतों ने समारोह में शिरकत की। समारोह का संचालन स. गुरभेज सिंह गुराया (दिल्ली) ने संक्षिप्त लेकिन अर्थपूर्ण अंदाज में किया।