मुंबई, 4 मार्च - बंबई उच्च न्यायालय ने शेयर बाजार में धोखाधड़ी के मामले में पूर्व सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के विशेष अदालत के आदेश पर रोक लगा दी है।
उल्लेखनीय है कि विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को शेयर बाजार धोखाधड़ी और नियामक अनियमितताओं के आरोप में पूर्व सेबी अध्यक्ष माधवी पुरी बुच और पांच अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। ये अधिकारी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड से संबद्ध हैं।
विशेष अदालत के न्यायाधीश शशिकांत एकनाथराव बांगर ने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया इस संबंध में अनियमितताओं और मिलीभगत के सबूत हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। बुच के अलावा जिन अन्य अधिकारियों के खिलाफ अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है उनमें बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदररामन राममूर्ति, तत्कालीन अध्यक्ष और सार्वजनिक हित निदेशक प्रमोद अग्रवाल और सेबी के तीन सदस्य अश्विनी भाटिया, अनंत नारायण और कमलेश चंद्र वार्ष्णेय शामिल हैं।
अदालत ने कहा था कि वह जांच की निगरानी करेगी और मामले पर रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर प्रस्तुत की जानी चाहिए। ये आदेश सपना श्रीवास्तव (47) की शिकायत के बाद दिए गए। शिकायतकर्ता ने बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी, नियामक उल्लंघन और भ्रष्टाचार के कथित अपराधों की जांच की मांग की थी।
पूर्व सेबी प्रमुख माधवी बुच को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाई
