हरियाणा/हिसार:- बलराज सभ्रवाल पूर्व ईटीओ एवं पूर्व प्रत्यासी इनेलो उकलाना ने इनेलो पार्टी की पूरी टीम की तरफ से जीत के लिये रीमा सोनी को मुबारकबाद दी ओर कहा कि, रीमा सोनी ने निर्दलीय चुनाव जीता है उसे किसी पार्टी में नही जाना चाहिये, ये बेटी रीमा सोनी और मंहेन्द्र सोनी जी के विवेक पर निर्भर करता है, सोनी साहब वही फैसला लेगे जो उकलाना की जनता और रीमा सोनी के भविष्य के लिये सही रहेगा। 
वैसे भी जीत के बाद हरेक पार्टी के लोग जीत के लिये अपने अपने दावे करेगे, लेकिन वो उनका सहयोग हो सकता है, क्योकिं सभी पार्टियों ने बीना शर्त के सर्मथन देने का ऎलान किया था, अब ये सोनी परिवार और उनकी टीम तथा समर्थकों पर ही छोड देना चाहिये कि उन्हे क्या फैसला करना है, जो विश्वास उकलाना की जनता ने सोनी परिवार पर किया था, उम्मीद है कि वो बिना किसी दबाव के उस फैसले पर खरा उतरने की कौशिश करेगे। 
वैसे भी रीमा सोनी की जीत के पचासों समिकरण है जैसे भाजपा के सर्वे मे जिताऊ उम्मीदवार अशोक गर्ग की पुत्रवधु की टिकट कटना, और श्रीनिवास गोयल की पुत्रवधु को टिकट देना, जिससे गर्ग साहब तो दबाव में आ गए लेकिन वर्कर नाराज हो गए। 
कांग्रेस का बिना सर्त समर्थन देना, इन्डियन नेशनल लोकदल पार्टी का बिना शर्त ऐसे मौके पर समर्थन देना जब ये मैसेज आने शुरु हो गए थे, की भाजपा जबरदस्ती करके चुनाव जीत जाएगी तब मैसेज आया कि काऊन्टीगं पर चौधरी अभय सिहॅं चौटाला जी आएगे उसी से प्रशासन के नट टाईट हो गए, मन्त्री कृष्ण बेदी के बडबोले भाषण, पूर्व मन्त्री अनूप धानक का SC और DSC समाज में पूरजोर विरोध होना, भाजपा नेत्री आशा खेदड का भाषण के बीच में माईक छीनना और उसका स्टेज से ये कहना कि ऐसा मत करो नही तो मेरा समाज नाराज हो जाएगा और वो सच्च में ही नाराज हो गया।
 वो उसके समाज के ल़िये वो एक संकेत था, जिससे उस समाज ने अपनी बेटी अपनी बहन अपनी बहु आशा खेदड के लिये नाराजगी बढी, और भाजपा को हार का मुह देखना पडा, भाजपा नेता श्रीनिवास गोयल जी की कार्यशैली के प्रति जनता की नाराजगी। सरकार ने 12 साल के भाजपा राज में उकलाना गाँव की बेदेखी करना, जिससे गांव के लोगों का गुस्सा फूटा और पूरा गावं एक तरफा हो गया। 
उकलाना हल्का से भाजपा के वर्कर की मन्त्री अनूप धानक और श्रीनिवास गोयल और कृष्ण बेदी तथा सीएम साहब नायब सेणी जी के कारण नाराजगी, तथा भाजपा के नाराज वर्करस ने क्रोस वोटीगं की, यानीकि भाजपा को वोट ना देकर रीमा सोनी को वोट दिया जिसकी वजह से उन वार्डो में भी रीमा सोनी जीत गई या उम्मीद से ज्यादा वोट प्राप्त किए, जहाँ भाजपा का गढ था, बिचोलियों ने पैसे लेकर अपने पास रख लिये और वोट नही खरीद पाए, क्योंकि वोट बिकाऊ थे ही नही। इस लिये एक नारा दिया गया था कि बेटी बचाओ बेटी जिताओ।
 कुल मिला कर इन सभी समिकरणो के चलते रीमा सोनी की जीत हुई है, अगर कोई ये कहे की ये जीत फलां पार्टी की जीत है तो उन्हे इस बहम में नही रहना चाहिये, तो फिर 74 हजार वोट लेकर जीतने वाली पार्टी भी अपनी पार्टी का उम्मीदवार तक नही उतार पाई, यदि उतार लेते तो सारा बहम निकल जाता, या यदि सोनी साहब को ही ये लगता कि हम फलां पार्टी से जीत सकते है तो वो पहले ही उस पार्टी की टिकट ले लेते, इस लिये रीमा सोनी का निर्दलिय चुनाव लडने का फैसला बहुत सौच समझ कर लिया हुआ फैसला था।
 जिससे भाजपा विरोधी सारे इक्कठे .हो गए, पूरे सोनी परिवार के साथ साथ सभी वर्कर की अथक मेहनत और रीमा सोनी के भाग्य में राजयोग था जिससे इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा मुकाम हासिल किया, और चेयरमैन की कुर्सी पर आसीन हुई। इस लिये इनकी जीत का श्रेय किसी व्यक्ती विशेष या किसी भी पार्टी को नही जाता, बल्कि पूरे उकलाना हल्का की जनता को ही जाता है और सभी समर्थन करने वाली पार्टियों को जाता है, इस लिये ये जीत रीमा सोनी के साथ साथ पूरे उकलाना की 36 बरादरी की जीत है।