चंडीगढ़, 14 अक्तूबर 2026:- पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़ में आज एआईसीटीई प्रायोजित तीन दिवसीय अटल–वाणी कार्यशाला का उद्घाटन किया गया। कार्यशाला का विषय “वर्ष 2070 तक भारत में हरित प्रौद्योगिकियों और नेट जीरो उत्सर्जन का रोडमैप” है। 14 से 16 अक्तूबर 2026 तक डोगरी भाषा में आयोजित की जा रही इस कार्यशाला का उद्देश्य टिकाऊ प्रौद्योगिकियों और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
उद्घाटन सत्र में एसआरआईसी के डीन प्रो. उमेश शर्मा के साथ विद्युत इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. संदीप कौर और उत्पादन एवं औद्योगिक इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख प्रो. एन. एम. सूरी उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति और प्रोत्साहन ने तकनीकी शिक्षा, सतत विकास और क्षेत्रीय भाषाओं को एक साथ जोड़ने वाली पहलों के महत्व को रेखांकित किया।
आयोजकों ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के कुलपति प्रो. भोला राम गुर्जर के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उनके सहयोग से ऐसे शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा मिलता है, जो नवाचार, विभिन्न विषयों के बीच सहयोग और पर्यावरणीय स्थिरता को प्रोत्साहित करता है। उनका समर्थन शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी प्रगति के माध्यम से समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।
कार्यशाला का समन्वय डॉ. मनोहर सिंह और डॉ. जिमी करलूपिया कर रहे हैं। दोनों की जड़ें जम्मू से जुड़ी हैं और उन्हें डोगरी भाषा में इस तकनीकी कार्यशाला का आयोजन करने पर विशेष गर्व है। यह पहल वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान को अधिक सुलभ बनाने तथा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने में क्षेत्रीय भाषाओं की क्षमता को उजागर करती है।
इस कार्यशाला में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और दिल्ली सहित देशभर के विभिन्न संस्थानों से वक्ताओं, शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने भाग लिया है। उनकी भागीदारी विचारों के आदान-प्रदान, संस्थागत अनुभव साझा करने और सतत विकास से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती है।
तकनीकी कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और पेशेवरों के विशेषज्ञ व्याख्यान शामिल हैं। सत्रों में ऊर्जा सुरक्षा, कचरे से ऊर्जा उत्पादन, सामग्री प्रसंस्करण के लिए माइक्रोवेव हाइब्रिड हीटिंग, औद्योगिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईआईओटी) के माध्यम से स्मार्ट विनिर्माण, हरित भवन प्रौद्योगिकियां, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, टिकाऊ जैव-सामग्री, कंपोजिट प्रौद्योगिकी, अपशिष्ट प्रबंधन और टिकाऊ ऊर्जा अवसंरचना जैसे विविध विषय शामिल हैं।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की वाणी पहल के अंतर्गत समर्थित यह कार्यशाला भारतीय भाषाओं के माध्यम से तकनीकी शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने का प्रयास करती है। इसमें भारत के वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के दीर्घकालिक दृष्टिकोण के समर्थन में हरित प्रौद्योगिकियों, टिकाऊ विनिर्माण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नवाचार को आगे बढ़ाने में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी जोर दिया गया है।
आयोजन दल ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण योगदान के लिए एआईसीटीई, संस्थान प्रशासन, सहभागी विभागों, आमंत्रित वक्ताओं और आयोजन की मुख्य टीम के सभी सदस्यों—जिनमें संकाय सहयोगी, कर्मचारी और विद्यार्थी स्वयंसेवक शामिल हैं—के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला 16 अक्तूबर 2026 तक जारी रहेगी। इस दौरान आयोजित होने वाले विशेषज्ञ व्याख्यानों और तकनीकी चर्चाओं का उद्देश्य नए विचारों को बढ़ावा देना, शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना और अधिक हरित एवं टिकाऊ भविष्य की दिशा में बदलाव को आगे बढ़ाना है।
