अहमदाबाद: गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाका मामले में विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा की पुष्टि कर दी है। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये तथा गंभीर रूप से घायल लोगों को 5 लाख रुपये का मुआवजा 30 मार्च 2027 तक देने का निर्देश भी दिया है। जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने दोषियों की सभी अपीलें खारिज कर दीं।
साल 2008 के इन सिलसिलेवार धमाकों में जान गंवाने वालों के परिजनों ने मंगलवार को गुजरात हाईकोर्ट के फैसले पर संतोष जताया। हालांकि उन्होंने कहा कि वे अब सजा को जल्द से जल्द लागू किए जाने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उन्हें "पूर्ण न्याय" मिल सके।
प्रत्यक्षदर्शियों और धमाकों में बचे लोगों ने घटना के बाद के भयावह मंजर को याद किया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि 18 वर्ष पहले सिविल अस्पताल में हुए विस्फोट के बाद उसने अपने आसपास लोगों को "मोमबत्तियों की तरह जलते" और शवों को पेड़ों से लटकते देखा था।
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद के विभिन्न इलाकों में महज 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। शहर के अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया था। गुजरात हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में विशेष अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को बरकरार रखा, जिसमें इंडियन मुजाहिदीन के 38 सदस्यों को फांसी और 11 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली सभी अपीलों को खारिज करते हुए सजा की पुष्टि की।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अहमदाबाद के मणिनगर क्षेत्र में हुए विस्फोट में अपने भाई चिराग शाह को खोने वाले अल्पेशकुमार शाह ने कहा, "आतंकवादियों में कोई मानवता नहीं होती और उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया का लाभ नहीं मिलना चाहिए। आज गुजरात हाईकोर्ट के फैसले से हमें उतनी ही राहत मिली है, जितनी वर्ष 2022 में विशेष अदालत द्वारा 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाए जाने पर मिली थी।"
धमाके के प्रत्यक्षदर्शी और जीवित बचे लोगों ने असारवा स्थित सिविल अस्पताल में हुए विस्फोट के भयावह दृश्य भी साझा किए। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के कार्यकर्ता लक्ष्मण चूड़ासमा ने बताया कि वह विस्फोट में घायल लोगों को असारवा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे, तभी वहां एक और धमाका हो गया।
उन्होंने कहा, "वीएचपी कार्यकर्ता के रूप में मैं घायलों को असारवा सिविल अस्पताल लेकर जा रहा था। जैसे ही मैं वहां पहुंचा और एंबुलेंस खड़ी की, जोरदार विस्फोट हुआ।" इस धमाके में उनके बाल बुरी तरह झुलस गए और उनके हाथों तथा पैरों में गंभीर चोटें आईं।
अहमदाबाद सीरियल बम धमाका मामला हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी और 11 की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी
